Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

ढलती उम्र में नई शुरुआत: 115 बुजुर्गों ने थामा उम्मीद का हाथ, बेटियां बनीं सहारा

ढलती उम्र में भी साथ की तलाश हुई तो भीलवाड़ा में अनुबंध फाउंडेशन के जीवनसाथी परिचय सम्मेलन में 115 बुजुर्ग पहुंचे. कई बेटियां अपने पिता को अकेलेपन से बचाने खुद लेकर आईं.

rajasthan news
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

भीलवाड़ा. अकेलेपन की खामोशी तोड़ने और जीवन की सांझ में फिर से साथी पाने की उम्मीद लेकर भीलवाड़ा में एक अनोखा नज़ारा देखने को मिला. यहां आयोजित जीवनसाथी परिचय सम्मेलन में 115 बुजुर्ग नई शुरुआत की आस लिए पहुंचे— और सबसे खास बात, कई बेटियां अपने पिता का अकेलापन दूर करने के लिए खुद उन्हें यहां लेकर आईं.

गुजरात के अहमदाबाद की अनुबंध फाउंडेशन द्वारा नागौरी गार्डन स्थित माहेश्वरी भवन में आयोजित इस पहल ने सामाजिक सोच को नई दिशा दी. 50 से 80 वर्ष आयु वर्ग के अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा महिला-पुरुषों ने इसमें हिस्सा लिया. अहमदाबाद, दिल्ली, जयपुर, कोटा और बीकानेर सहित कई शहरों से आए 80 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया, जिनमें 30 महिलाएं भी शामिल रहीं.

इस सम्मेलन की सबसे बड़ी खासियत रही— यहां रिश्तों पर किसी जाति या धर्म की दीवार नहीं थी. सिर्फ इंसानी भावनाएं और साथ की जरूरत थी.

प्रतिभागियों को अपने दस्तावेजों के साथ मंच पर अपनी बात रखने का मौका मिला. आयोजकों ने रहने, खाने और जरूरतमंदों के लिए यात्रा सहायता तक की व्यवस्था की. यहां बनने वाले जोड़ों का आगे विधिवत विवाह भी कराया जाएगा.

संस्था के अध्यक्ष नट्टू भाई पटेल के मुताबिक, इस पहल की शुरुआत 2001 के भूकंप के बाद हुई थी, जब उन्होंने अपनों को खो चुके लोगों का दर्द करीब से देखा. आज यह 95वां सम्मेलन है— अब तक 15 हजार से ज्यादा लोगों को मंच मिल चुका है और 225 से अधिक शादियां कराई जा चुकी हैं. इस बार भी 5 से 7 नए रिश्तों की उम्मीद है.

संस्था की सचिव किन्नरी लखाणी ने कहा कि महिलाएं आज भी सामाजिक दबाव के कारण अपनी भावनाएं खुलकर नहीं रख पातीं—ऐसे में यह मंच उन्हें नई हिम्मत देता है.

सम्मेलन में शामिल लोगों ने भी इसे उम्मीद की किरण बताया. दिल्ली से आई सुमन चौधरी ने कहा—“जिंदगी के हर पड़ाव पर साथी जरूरी होता है.” वहीं पंजाब से आए डॉ. दिलबाग राय भाटिया ने इसे “भावनात्मक सहारे की सच्ची पहल” बताया.

भीलवाड़ा का यह आयोजन सिर्फ रिश्ते जोड़ने का मंच नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश देने की कोशिश है कि जिंदगी की शाम भी सुनहरी हो सकती है— बस साथ होना चाहिए.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital