विदेशों से संचालित राष्ट्र विरोधी गैंग केवल हथियारों और आतंकवाद के जरिए ही भारत को चुनौती नहीं दे रहे हैं, बल्कि नशे के कारोबार का भी लगातार बढ़ावा दे रहे हैं. जिस तरह से वह स्थानीय प्रशासन और जाँच एजेंसियों की मिलीभगत से बेखोफ इस कारोबार का संचालन कर रहे हैं, वह आशंका ख़ुफ़िया एजेंसियों को बेहद परेशां कर रही है.
नशे के कारखाने पर छपा
दरअसल DRI (Directorate of Revenue Intelligence) ने “ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक” के माध्यम से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बाहरी इलाके जगदीशपुरा में छापेमारी की थी. बीते माह हुई इस छापामारी के दौरान करीब 92 करोड़ रुपए कीमत की 61.20 किलो लिक्विड मिफेड्रोन करीब साढ़े पांच सौ किलो कच्चा मॉल बरामद किया. जिस कारखाने से यह माल बरामद हुआ. वह काफी समय से चल रहा था. ऐसे में स्थानीय पुलिस और एजेंसियों के कामकाज को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
डी कंपनी का सीधा कनेक्शन
DRI की जाँच में सामने आई जानकारी के अनुसार यह पूरा अवैध कारोबार पाकिस्तान में छिपे फरार दाऊद इब्राहिम से सम्बंधित है. दाऊद के खास गुर्गे इक़बाल मिर्ची का खास सलीम “डोला” इस्माइल, इस पूरे नेटवर्क को चला रहा था, ख़ुफ़िया एजेंसियों के वह फ़िलहाल तुर्की से पुरा काला कारोबार संचालित कर रहा है और उसका नेटवर्क मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश में भी फैला हुआ है. वह अपने नेटवर्क के जरिए पूरे ड्रग कार्टेल को संचालित करता है और उसका भतीजा मुस्तफा कुब्बावाला (जिसके खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया हुआ है) उसका मुख्य सहयोगी है.
खुफिया एजेंसियों का मानना है कि फरार अपराधी दाऊद इब्राहिम, सलिम ‘डोला’ इस्माइल और उमैर-उर-रहमान मिलकर पाकिस्तान और दुबई से पैसे लगाकर नशीली दवा मिफेड्रोन का उत्पादन और तस्करी (जिसे सड़कों पर “म्याऊ-म्याऊ” के नाम से जाना जाता है) चला रहे हैं.
इस कार्रवाई के दौरान कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया गया. इनमें अब्दुल फैज़ल कुरैशी फार्मेसी डिप्लोमा धारक है और उसका सहयोगी रज़्ज़ाक खान (विदिशा) शामिल हैं. ये उस फैक्ट्री का संचालन कर रहे थे. यह फैक्ट्री पूरी तरह आधुनिक स्तर पर बनी हुई थी, जहां मशीनों के साथ रिएक्टर और तापमान नियंत्रित चेंबर भी मौजूद थे.
इस दौरान उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से पकड़े गए कार्टेल के सदस्य मुंबई से कच्चे माल की आपूर्ति संभालते थे. जिनकी निशानदेही पर मुंबई में दो सप्लायर और एक ट्रांसपोर्टर को भी पकड़ा गया. जबकि गुजरात के सूरत में एक ऐसे हवाला ऑपरेटर को भी दबोचा गया है जो फंड की व्यवस्था कर रहा था.
हवाला का भी है मामला
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ कि सूरत और मुंबई से हवाला चैनलों के जरिए पैसा भोपाल भेजा जा रहा था. ताकि कार्टेल के सरगना नशे का सामान तैयार कर रही फैक्ट्री को निर्बाध तरीके से संचालित करते रहे. सूरत से कार्टेल का एक और करीबी सहयोगी भी गिरफ्तार किया गया है. सनद रहे कि यह पिछले एक वर्ष में DRI द्वारा ध्वस्त की गई छठी मिफेड्रोन फैक्ट्री है और भोपाल के पास 10 महीनों में ही दूसरी बार ऐसी यूनिट पकड़ी गई है. अक्टूबर 2024 में ऐसी ही भोपाल के बैगरौदा औद्योगिक क्षेत्र से 907 किलो मिफेड्रोन जब्त किया गया था. जिसकी कीमत लगभग ₹1,814 करोड़ आंकी गई थी.
नशे का महाराष्ट्र कनेक्शन
कारखाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल—मेथिलीन डाइक्लोराइड, एसीटोन, मोनोमेथिलएमीन, हाइड्रोक्लोरिक एसिड, 2-ब्रोमो महाराष्ट्र के भीवंडी और ठाणे इलाके से आपूर्ति किए जा रहे थे. जिन्हे सलिम डोला के आदेश पर मिनी ट्रकों से भोपाल पहुँचाया जाता था. पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि लगभग 400 किलो केमिकल पहले ही मुंबई से भोपाल भेजे जा चुके थे. खास बात यह है कि नेटवर्क के मास्टरमाइंड ने स्थानीय लोगों को भी इस धंधे में शामिल कर लिया था. अज़हरुद्दीन इदरीसी को कथित तौर पर यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि वह भीवंडी के अंजूर फाटा से खेप उठाकर सीधे मध्य प्रदेश के भीतर तक पहुंचाए.
स्थानीय प्रशासन शक के दायरे में
जांच एजेंसी के अधिकारियों को आशंका है कि बिना रिश्वतखोरी और मिलीभगत के इतने समय तक यह कारोबार नहीं चल सकता. बिना स्थानीय एजेंसियों के संरक्षण और भ्रष्ट तंत्र की मदद के इतनी हाई-वोल्टेज ड्रग लैब सालों तक छिपी नहीं रह सकती. जांच इस बात पर भी हो रही है कि जिन अधिकारियों ने यहां बिजली कनेक्शन से इंकार कर दिया था, उन्होंने अचानक रिकॉर्ड समय में इसकी मंज़ूरी कैसे दे दी?
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