मालेगांव केस (Malegaon case) में 17 साल बाद NIA कोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुना दिया है. अदालत ने बीजेपी के पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा (Sadhvi Pragya) और कर्नल पुरोहित समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. कोर्ट के फैसले के बाद ATS के रिटायर्ड अधिकारी ने बड़ा खुलासा किया है. रिटायर्ड अधिकारी के खुलासे ने सभी को चौंका दिया है. उनकी माने तो RSS अध्यक्ष को पकड़ने के लिए बोला गया था.
ATS के पूर्व अधिकारी ने क्या बताया ?
ATS के रिटायर्ड अधिकारी महबूब मुजावर (Mehboob Mujawar) ने बताया कि मुझे आदेश दिया गया था कि इस केस में किसी तरह से मोहन भागवत को फंसाया जाए. उनका कहना है कि भागवत को इसलिए पकड़ लाने के लिए बोला गया था कि जिससे साबित किया जा सके कि मालेगांव ब्लास्ट भागवा आतंक था.
सेवानिवृत्त एटीएस अधिकारी महबूब मुजावर ने कहा कि मुझे आदेश दिया गया था कि किसी तरह मोहन भागवत को इस मामले में फंसाया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि भागवत को इसलिए पकड़ने के लिए बोला गया था ताकि यह साबित हो सके कि मालेगांव विस्फोट भागवा आतंक था.
किसने दिया था आदेश ?
सेवानिवृत्त अधिकारी महबूब मुजावर ने बताया कि इस केस में मुझे इसलिए जोड़ा गया था कि बालेगांव ब्लास्ट को भागवा आतंक प्रमाणित किया जाए. मुझे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अध्यक्ष मोहन भागवत को फंसाने के लिए आदेश दिया गया था. इस दौरान उन्होंने ये भी खुलासा किया कि किसने आदेश दिया था. उन्होंने बताया कि ये आदेश उस समय केस की जांच कर रहे परमबीर सिंह ने दिया था.
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मृक लोगों का चार्जशीट में नाम
महबूब मुजावर आगे कहते हैं कि इस मामले में जिन लोगों की हत्या हुई थी, उनके नाम भी पुलिस की चार्जशीट में दर्ज किए गए थे ताकि उन्हें जिंदा दिखाया जा सके. उन्हें मृत लोगों की लोकेशन ट्रेस करने के लिए कहा गया था. उन्होंने दावा किया कि जब उन्होंने कोई गलत काम करने से इनकार कर दिया तो उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया लेकिन वे निर्दोष साबित हुए.
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-भारत एक्सप्रेस
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