बिहार की राजनीति एक बार फिर जातीय और सामाजिक समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमने लगी है. 2025 के विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटे महागठबंधन ने इस बार EBC (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) को अपने चुनावी अभियान के केंद्र में रखा है.
यह रणनीतिक बदलाव न सिर्फ नीतीश कुमार के पारंपरिक वोट बैंक को चुनौती देने की कोशिश है, बल्कि यह संकेत भी है कि आरजेडी और कांग्रेस अब अपनी पारंपरिक ‘MY (मुस्लिम-यादव)’ छवि से बाहर निकलने के लिए गंभीर हैं.
EBC: एक बड़ा और निर्णायक वोट बैंक
बिहार की कुल आबादी में EBC की हिस्सेदारी लगभग 36% है. इस वर्ग में 112 जातियाँ शामिल हैं, जिनमें तेली, मल्लाह, कानू, नाई, कुम्हार, बढ़ई, धोबी, धनुक आदि प्रमुख हैं.
इन जातियों की सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक स्थिति अभी भी पिछड़ेपन से जूझ रही है,पर चुनावी राजनीति में इनकी भूमिका निर्णायक होती जा रही है, और यही वजह है कि अब सभी प्रमुख दल EBC को साधने की कोशिश में हैं.
EBC को केंद्र में लाना महागठबंधन की रणनीति
पटना के होटल चाणक्य में 24 सितंबर को होने वाले कार्यक्रम में ‘न्याय संकल्प पत्र’ जारी किया जाएगा. इस मौके पर राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और CPI(ML) के सुधामा प्रसाद मंच साझा करेंगे. इस संकल्प पत्र में शामिल हो सकते हैं
शिक्षा और रोजगार के अवसरों का विस्तार,अत्याचार से कानूनी संरक्षण,EBC को विशेष आरक्षण की गारंटी,सरकारी योजनाओं में EBC की प्राथमिक भागीदारी
इस संकल्प पत्र के द्वारा महागठबंधन EBC को करीब लाने का प्रयास कर रहा है.
राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश
पिछले चुनावी आंकड़े बताते हैं कि EBC समुदाय का झुकाव नीतीश कुमार और जेडीयू की ओर अधिक रहा है:
- दल EBC उम्मीदवार (2020) विजयी
- जेडीयू 17 12
- आरजेडी 19 4
- आरजेडी ने पहली बार EBC नेता मंगनी लाल मंडल (धनुक जाति) को प्रदेश अध्यक्ष बनाया.
- कांग्रेस ने अलग से EBC विभाग की स्थापना की है.
- दोनों दल इस बार ज्यादा संख्या में EBC उम्मीदवार उतारने की योजना पर काम कर रहे हैं.
बिहार विधानसभा ने पिछली जातीय जनगणना के बाद OBC आरक्षण को 18% से बढ़ाकर 25% किया था. लेकिन पटना हाईकोर्ट ने इस कानून को रद्द कर दिया.
महिला वोटरों की ओर भी झुकाव
EBC के साथ-साथ कांग्रेस अब महिला वोटरों को भी साधने की दिशा में बढ़ रही है.
26 सितंबर को प्रियंका गांधी की मौजूदगी में महिला एजेंडा लॉन्च किया जाएगा, जिसमें:
कर्जमाफी,महिला सुरक्षा,स्वरोजगार योजनाएं जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी.
यह पहल महिला EBC वोटरों को सीधे आकर्षित करने की दिशा में हो सकती है, जो बिहार की ग्रामीण राजनीति में अहम भूमिका निभाती हैं.
क्या बदल पाएंगे समीकरण?
EBC को साधने की यह रणनीति महागठबंधन के लिए निर्णायक साबित हो सकती है — यदि इसे जमीन पर सही से उतारा जाए क्योंकि राहुल गांधी भी लगातार पिछड़ों की बात कर रहे है ,आरजेडी भी इससे मुस्लिम-यादव पार्टी की छवि को तोड़ने में कामयाब हो सकती है
लेकिन असली चुनौती होगी EBC समुदाय का विश्वास जीतना, वादों को विश्वसनीय बनाना और नीतीश कुमार की वर्षों की पकड़ को कमजोर करना. राजनीति में वादे करना आसान है, पर उन्हें अमल में लाना और जनता को भरोसा दिलाना — वही असली चुनावी चुनौती होती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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