Bihar Student Protest Case
Bihar Student Protest Case: नीट पेपर लीक के खिलाफ बिहार में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों और अन्य लोगों को राज्य सरकार ने बड़ी राहत दी है. सरकार ने साफ किया है कि तय समय सीमा तक हुए प्रदर्शनों को लेकर किसी भी व्यक्ति के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी.
इसके साथ ही छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होगी. हिरासत या जेल में बंद लोगों को भी जल्द रिहा किया जाएगा.
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों के बाद बिहार के कई जिलों में छात्र सड़कों पर उतर आए थे. जगह-जगह प्रदर्शन हुए, सड़कें जाम की गईं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी हुई. कुछ स्थानों पर हालात बिगड़ने के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया था.
इन मुकदमों के कारण छात्रों और उनके परिवारों में चिंता बढ़ गई थी. उन्हें डर था कि पुलिस केस का असर पढ़ाई, नौकरी और भविष्य की दूसरी संभावनाओं पर पड़ सकता है. अब सरकार के फैसले के बाद ऐसे परिवारों ने राहत की सांस ली है.
सरकार ने दिए चार बड़े आश्वासन
राज्य सरकार के मुताबिक, 26 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे तक बिहार में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ दंडात्मक, बदले की भावना से या किसी अन्य तरह की प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी.
इस समय सीमा से पहले दर्ज सभी एफआईआर, शिकायतों और जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को वापस लेने के लिए कानूनी प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाएगी.
इसके अलावा, इन मामलों में गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए छात्रों और प्रदर्शनकारियों को जल्द से जल्द रिहा करने का भी फैसला लिया गया है.
सरकार ने यह भरोसा भी दिया है कि तय समय से पहले दर्ज मामलों में नामजद लोगों के खिलाफ भविष्य में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई कार्रवाई नहीं होगी.
तेजस्वी यादव ने दिया था अल्टीमेटम
इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार को 27 जुलाई की रात 12 बजे तक का अल्टीमेटम दिया था. उन्होंने चेतावनी दी थी कि छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो 29 जुलाई की सुबह 7 बजे से बिहार में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा.
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तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने की समय सीमा तय कर दी गई है. उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर भी इस संबंध में चेतावनी देने की बात कही थी.
सरकार के ताजा फैसले को छात्र आंदोलन के दबाव और बढ़ते राजनीतिक विरोध से जोड़कर देखा जा रहा है.
-भारत एक्सप्रेस
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