बिहार की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त उबाल है. एक तरफ नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा की दर्दनाक हत्या ने लोगों का दिल दहला दिया है, तो दूसरी तरफ इस मुद्दे पर शुरू हुई सियासत अब सड़कों तक आ पहुंची है. इस पूरे मामले को लेकर बिहार कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने राजधानी पटना सहित कई इलाकों में जोरदार प्रदर्शन किया और नीतीश सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया.
प्रदर्शन के दौरान माहौल तब और गरमा गया जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला फूंका. प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि राज्य में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं और सरकार अपराधियों पर नकेल कसने के बजाय विपक्ष की आवाज दबाने में लगी है.
नारेबाजी कर रहे कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बिहार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और पुलिस प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है.
पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर छिड़ा संग्राम
इस विरोध प्रदर्शन का एक बड़ा सिरा निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी से भी जुड़ा है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि पप्पू यादव को तुरंत रिहा किया जाए. दरअसल, राजनीति के गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि पप्पू यादव को एक 31 साल पुराने मामले में अचानक गिरफ्तार करना कहीं न कहीं छात्रा की हत्या के मामले से ध्यान भटकाने की कोशिश है.
विपक्षी नेताओं का सीधा आरोप है कि राज्य सरकार छात्रा के असली कातिलों को बचाने का प्रयास कर रही है. उनका तर्क है कि जब भी विपक्ष सरकार की नाकामियों पर सवाल उठाता है या पीड़ित परिवार के हक में खड़ा होता है, तो पुरानी फाइलों को खोलकर नेताओं को जेल भेज दिया जाता है ताकि आंदोलन को कमजोर किया जा सके.
क्या है पूरा विवाद?
नीट छात्रा की मौत ने ना केवल एक परिवार का चिराग बुझाया है, बल्कि बिहार की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा कर दिया हैं. विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर सरकार को घेर रहा है, वहीं प्रशासन इसे एक कानूनी प्रक्रिया बता रहा है. लेकिन आम जनता के बीच इस बात को लेकर काफी नाराजगी है कि आखिर बेटियों के साथ ऐसी हैवानियत कब रुकेगी?
कांग्रेस का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ एक सांसद की रिहाई की नहीं, बल्कि उस छात्रा को इंसाफ दिलाने की है जिसे बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया.
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-भारत एक्सप्रेस
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