पटना के मुख्य सचिवालय की हवाओं में आज एक अजीब सी खामोशी और भारीपन है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज जब कैबिनेट की बैठक की अध्यक्षता करने पहुंचे, तो उनके चेहरे पर वही पुरानी सौम्यता थी, लेकिन यह बैठक ‘अंतिम’ थी. बैठक खत्म हुई, और फिर शुरू हुआ यादों को कैमरे में कैद करने का सिलसिला. नीतीश कुमार ने अपने मंत्रिपरिषद के साथियों और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ग्रुप फोटोग्राफी कराई. मुख्य सचिवालय के पोर्टिको से बाहर निकलते समय जब उन्होंने हाथ जोड़कर सबका अभिवादन किया, तो यह साफ हो गया कि बिहार में अब तख्त बदलने वाला है.
अंतिम कैबिनेट के बाद इस्तीफा
नीतीश कैबिनेट की इस आखिरी बैठक में मंत्रिपरिषद को भंग करने का बड़ा फैसला लिया गया है. नीतीश कुमार राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया. चूंकि वे पहले ही राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ले चुके हैं, इसलिए अब वे केवल औपचारिक रूप से पद छोड़ रहे हैं. इसके बाद सारा ध्यान शाम एनडीए विधायक दल की बैठक पर टिक गया है, जहां बीजेपी पहली बार राज्य में अपना मुख्यमंत्री बनाने का दावा पेश करेगी.
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शिवराज सिंह चौहान और ‘पर्ची’ का सस्पेंस
बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम और दिग्गज नेता शिवराज सिंह चौहान को ‘केंद्रीय पर्यवेक्षक’ बनाकर पटना भेजा है. ‘मामा’ के नाम से मशहूर शिवराज विधायक दल की बैठक में हिस्सा लेंगे और दिल्ली से आए नाम की घोषणा करेंगे. सियासी गलियारों में सम्राट चौधरी, श्रेयसी सिंह और विजय सिन्हा जैसे नाम तेजी से उछल रहे हैं, लेकिन असली सस्पेंस अभी भी बरकरार है कि शिवराज किसके नाम की पर्ची निकालते हैं. बीजेपी के कार्यकर्ता जहां उत्साहित हैं, वहीं जेडीयू के कुछ गुटों में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर हल्की नाराजगी भी देखी जा रही है.
निशांत कुमार विरासत का नया दावेदार?
इस पूरे ड्रामे के बीच सबसे बड़ा ‘एक्स-फैक्टर’ नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार हैं. जेडीयू के गलियारों में चर्चा तेज है कि निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री हो सकती है. कुछ विधायकों ने तो उन्हें ‘डिप्टी सीएम’ बनाने तक की मांग कर दी है. हालांकि निशांत ने पहले संगठन में काम करने की इच्छा जताई थी, लेकिन जेडीयू को लगता है कि उनके आने से युवाओं में एक सकारात्मक संदेश जाएगा. क्या नीतीश अपनी विरासत बेटे के हाथों में सौंपेंगे या कोई नया चेहरा सामने आएगा?
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15 अप्रैल 2026 की तारीख बिहार के इतिहास में दर्ज होने जा रही है, जब राज्य को एक नया मुख्यमंत्री मिलेगा. नीतीश कुमार का युग थम रहा है और बीजेपी के नेतृत्व में एक नई शुरुआत हो रही है. सचिवालय की वो ग्रुप फोटो अब इतिहास का हिस्सा बन गई है. अब सबकी निगाहें राजभवन की ओर हैं, जहां शाम होते-होते बिहार की किस्मत का नया फैसला लिखा जाएगा. क्या नया चेहरा बिहार को उन ऊंचाइयों पर ले जाएगा जिसकी कल्पना नीतीश कुमार ने की थी? सस्पेंस गहरा है और जवाब बस चंद घंटों की दूरी पर है.
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