खेतों में अब नहीं घुसेगी नीलगाय
AI In Agriculture For Protect Crops: आधी रात को फोन बजता है. सामने से कोई बोल रहा है अरे भाई जागो तुम्हारे खेत में जानवर घुस गए हैं. इसके बाद किसान दौड़ता है और अपनी फसल को बचाने के लिए तमाम तरह के उपयो करता है. इसमें उसके समय और संसाधन दोनों की हानि होती है. अगर आप ग्रामीण इलाकों से हैं तो जानते ही होंगे कि किसान समूह बनाकर एक-दूसरे को जानवरों की जानकारी देते हैं. हालांकि, 24 घंटे खेतों की निगरानी संभव नहीं है. इसी समस्या का हल बिहार के भागलपुर जिले के एक स्टार्टअप ने खोज निकाला है. इससे किसानों का जीवन थोड़ा आसान हो जाएगा साथ ही फसलों की 24 घंटे निगरानी भी संभव हो पाएगी.
सबसे बड़ी समस्या नीलगाय
नीलगाय को मारना इस समस्या का कोई टिकाऊ समाधान नहीं है. पर्यावरणविदों और कृषि वैज्ञानिक तर्क देते हैं कि नीलगाय को मारने से समस्या का समाधान नहीं होगा. इसके बजाय, विशेषज्ञ नीलगायों के लिए एक सुरक्षित स्थान का निर्माण करने की सलाह देते हैं, जिससे वे गांवों की ओर पलायन न करें. इसी कारण स्टार्टअप ने अपनी डिवाइस को नीलगाय को केंद्र में रखकर तैयार किया है.
इस डिवाइस की खासियत (Agriculture AI Device)
- 5MP डे एंड नाइट विजन कैमरा
- फोटो के साथ अलर्ट
- सौर ऊर्जा से चलता है
- कीमत 42 हजार 500 रुपये
- जानवरों के हिसाब से अलग-अलग आवाजें
स्टार्टअप ने दिया तत्काल हाइटेक उपाय (Protect Crops By AI)
बिहार के भागलपुर में एक स्टार्टअप ने एआई से चलने वाला एक उपकरण तैयार किया है. यह प्रणाली खेत में जानवरों की घुसपैठ का पता लगाने के लिए 5MP डे एंड नाइट विजन कैमरा और खास एल्गोरिदम का उपयोग करती है. जब भी कोई जानवर प्रवेश करता है, तो एक लाइट अपने आप जल जाती है और जानवर को डराने के लिए हूटर बजता है. इस प्रणाली की कीमत 42 हजार 500 रुपये है.
उपकरण की खासियत
यह उपकरण जानवर की घुसपैठ के मामले में एक फोटो के साथ किसान के मोबाइल पर अलर्ट भेजता है. उपकरण से निकलने वाली आवाजें जानवरों के हिसाब से अलग-अलग हैं. नीलगाय को भगाने के लिए पटाखे और ताली की आवाज का उपयोग किया जाता है.
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नीलगाय से बचने के दूसरे तरीके
नीलगाय से निपटने के लिए दूसरे प्रस्तावित तरीकों में गंध आधारित भगाने वाले पदार्थों का उपयोग शामिल है. इसके तहत गोबर और पानी का मिश्रण या नीम के पत्तों और सड़े हुए अंडों से बने मिश्रण का इस्तेमाल किया जा सकता है. कुछ शोधकर्ता नीलगाय को पालतू बनाने की वकालत करते हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञ नीलगाय का बधियाकरण कर तेजी से बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने की वकालत करते हैं. वहीं कृषि विभाग किसानों को बाड़े बनाने की सलाह देता है. इसमें खर्च और मेहनत आती है. ऐसे में भागलपुर के स्टार्टअप ने एक आसान समाधान दिया है.
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