बिहार में छात्र-युवा आंदोलन को लेकर माहौल एक बार फिर गरमाने लगा है. 22 और 25 जुलाई को हुए उग्र प्रदर्शनों के बाद पुलिस ने उपद्रवियों की पहचान कर धरपकड़ और गिरफ्तारी अभियान तेज कर दिया है. वहीं दूसरी ओर, वामपंथी दलों और छात्र संगठनों ने पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से पूरी तरह भुनाने के मूड में दिख रहा है और अब दिल्ली से बड़े नेताओं का रुख भी बिहार की तरफ होने लगा है.
‘समझौते का उल्लंघन कर रही सरकार’
भाकपा-माले (CPI-ML Liberation) ने राज्य सरकार पर दमनकारी नीति अपनाने का आरोप लगाया है. पार्टी का कहना है कि प्रशासन जंतर-मंतर पर हुए समझौते का खुला उल्लंघन कर रहा है.
हाल ही की कार्रवाई में सिवान से रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (RYA) के जिला उपाध्यक्ष विशाल यादव समेत चार युवा नेताओं को गिरफ्तार किया गया है. इसके अलावा भाकपा-माले विधायक संदीप सौरव, जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष धनंजय, एआईएसए (AISA) के बिहार सचिव दीपांकर मिश्रा और पटना यूनिवर्सिटी अध्यक्ष सबा आफरीन समेत कई नेता पहले से ही जेल में बंद हैं.
दिल्ली से पटना पहुंचीं AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष
छात्रों की गिरफ्तारी के बाद आंदोलन को और धार देने के लिए AISAॉ की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा खुद पटना पहुंच चुकी हैं. पार्टी नेताओं के मुताबिक, नेहा बोरा जेल में बंद छात्रों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगी. वे पुलिस कार्रवाई का पूरा ब्योरा जुटाकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगी और प्रदर्शनकारियों की तुरंत रिहाई की मांग करेंगी.
कब तक चलेगा आंदोलन?
वामपंथी संगठनों ने साफ कर दिया है कि जब तक गिरफ्तार किए गए सभी छात्र नेताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा नहीं किया जाता और उन पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए जाते, तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है. आने वाले दिनों में इस प्रदर्शन को पूरे बिहार में जिला स्तर पर और उग्र रूप से फैलाने की तैयारी की जा रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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