Bihar MLC Elections: बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए हुए चुनाव और उपचुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं. इस बार किसी भी सीट पर मुकाबले की नौबत नहीं आई. सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए. इन विजेताओं में भोजपुरी सिनेमा के लोकप्रिय गायक और अभिनेता पवन सिंह का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है.
गुरुवार को नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद चुनावी तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई. विधानसभा कोटे की नौ सीटों पर होने वाले द्विवार्षिक चुनाव और एक सीट पर हुए उपचुनाव के लिए कुल 10 उम्मीदवार मैदान में थे. चूंकि किसी सीट पर उम्मीदवारों की संख्या तय सीटों से अधिक नहीं थी, इसलिए सभी प्रत्याशी बिना मतदान के ही जीत गए.
पवन सिंह समेत एनडीए के उम्मीदवारों की जीत
इस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सभी उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत दर्ज की. भाजपा की ओर से भोजपुरी स्टार पवन सिंह के अलावा संजय प्रकाश, मयूख, अनिल ठाकुर और शीला पंडित विजयी घोषित किए गए. वहीं जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद को विधान परिषद की सदस्यता मिली है.
इसके अलावा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अशरफ अंसारी भी निर्विरोध चुने गए. विपक्ष की ओर से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवार सुनील सिंह ने भी जीत हासिल की.
नीतीश कुमार की खाली सीट पर भी हुआ उपचुनाव
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा खाली की गई विधान परिषद की एक सीट पर उपचुनाव कराया गया था. इस सीट के लिए भी केवल एक उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल किया था. ऐसे में यहां भी चुनाव की आवश्यकता नहीं पड़ी और उम्मीदवार को निर्विरोध विजयी घोषित कर दिया गया.
एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर उठ रहा सवाल
हालांकि चुनावी नतीजों से ज्यादा चर्चा एनडीए के अंदर सीटों के बंटवारे को लेकर हो रही है. गठबंधन में शामिल राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) को इस बार एक भी सीट नहीं मिलने पर राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं.
पार्टी के नेता दीपक प्रकाश इस समय राज्य सरकार में मंत्री हैं, लेकिन वे विधानसभा या विधान परिषद, किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं. संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार मंत्री बनने के छह महीने के भीतर किसी एक सदन का सदस्य बनना जरूरी होता है. ऐसे में सीट न मिलने के कारण उनके मंत्री पद को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं.
वहीं राजद के भीतर भी सुनील सिंह को एक बार फिर विधान परिषद भेजे जाने के फैसले को लेकर नाराजगी दिखाई दे रही है. पार्टी के अंदर से ही इस निर्णय पर सवाल उठने लगा हैं.
राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव और बेटी रोहिणी आचार्या ने भी इस फैसले पर अपनी आपत्ति जताई है. इतना ही नहीं, पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम ने विरोध स्वरूप संगठन के महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफा दे दिया. हालांकि पार्टी नेतृत्व ने उनका इस्तीफा फिलहाल स्वीकार नहीं किया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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