Rajasthan Politics Viral Video: साहिल/बीकानेर: राजस्थान के बीकानेर में आयोजित नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन (यूडीएच) मंत्री झाबर सिंह खर्रा की जनसुनवाई उस समय एक राजनीतिक ‘अखाड़े’ में बदल गई, जब सरकारी सिस्टम की एक कड़वी सच्चाई भरे मंच से गूंज उठी. एक फरियादी ने सीधे तौर पर बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) के अधिकारियों पर ‘टोकन मनी’ (कथित रिश्वत) के बिना कोई काम न करने का गंभीर आरोप जड़ दिया. इस शिकायत ने न सिर्फ जनसुनवाई का माहौल गर्मा दिया, बल्कि मंत्री और फरियादी के बीच हुई तीखी बहस ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
‘आम लोगों को चक्कर कटवा रहे हैं, पैसा चाहिए!’ (Rajasthan Big News Update)
पूरा बवाल तब शुरू हुआ जब फरियादी गोपाल किराडू ने मंत्री के सामने अपनी पीड़ा रखते हुए दावा किया कि BDA में आम लोगों के बिल्कुल जायज और वैध कार्य भी बिना ‘लेन-देन’ के नहीं हो रहे हैं. शिकायतकर्ता ने साफ शब्दों में कहा कि आम नागरिकों को बेवजह परेशान किया जा रहा है और फाइल आगे बढ़ाने के लिए कथित रूप से पैसे की मांग की जाती है. इन आरोपों के लगते ही जनसुनवाई के पंडाल में भारी हलचल मच गई.
‘मुझे 55 साल का अनुभव है… हंगामा मत करो’
अधिकारियों पर सरेआम लगे इन भ्रष्टाचार के आरोपों को सुनकर यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा का पारा हाई हो गया. उन्होंने नाराजगी जताते हुए शिकायतकर्ता को तथ्यों के साथ अपनी बात रखने की नसीहत दी.
बीकानेर में मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने एक परिवादी को फटकारा, बोले- तुम जैसे कई आते हैं जाते है @officialkharra #bikaner #fairreport @BJP4India @8PMnoCM pic.twitter.com/UpLwnE8C4p
— Fair Report (@fairreportnews) June 3, 2026
वायरल हो रहे वीडियो में मंत्री साफ तौर पर फरियादी को फटकार लगाते हुए कहते हैं: “मैं पिछले दिन से बीकानेर में हूँ… अगर इतनी ही परेशानी थी तो कल शाम 5 बजे, रात 8:30 बजे या आज सुबह 9-10 बजे आकर मिल सकते थे. अंतिम समय में आकर केवल शोर मचाने से समस्या का समाधान नहीं होगा.” मंत्री ने कड़े लहजे में यह भी याद दिलाया कि उन्हें राजनीति में 55 वर्षों का अनुभव है और वे ऐसी परिस्थितियों को बहुत अच्छी तरह समझते हैं.
पट्टे की फाइल वाले युवक को भी लगाई लताड़ (Rajasthan BDA corruption allegations)
हंगामा यहीं नहीं थमा. इसी दौरान एक अन्य युवक भी अपनी पट्टे से जुड़ी फाइल लेकर मंत्री के सामने पहुंच गया. मंत्री के गुस्से का शिकार उसे भी होना पड़ा. उन्होंने उसे फटकारते हुए कहा कि अगर वास्तव में कोई परेशानी है, तो निर्धारित समय पर आकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मिलना चाहिए, बिना तैयारी और तथ्यों के आरोप लगाने से कुछ हासिल नहीं होगा.
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विधायक ने शांत कराया मामला
मंत्री और फरियादी के बीच जब नोकझोंक ज्यादा बढ़ने लगी, तो स्थिति को संभालने के लिए मौके पर मौजूद विधायक जेठानंद व्यास को हस्तक्षेप करना पड़ा. विधायक ने फरियादी को भरोसा दिलाया कि उसकी शिकायत पर पूरी गंभीरता से विचार किया जाएगा और अगर किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार सामने आया, तो सख्त कार्रवाई होगी. विधायक के आश्वासन के बाद माहौल तो शांत हो गया, लेकिन इस ‘टोकन मनी’ वाले हंगामे ने बीकानेर के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जरूर छेड़ दी है कि क्या वाकई सरकारी दफ्तरों में बिना ‘चढ़ावे’ के आम आदमी की फाइलें आगे नहीं बढ़तीं?
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