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जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर लगे केस खत्म हो जाएंगे या लटक जाएंगे? क्या कहता है कानून?

Student Protest FIR: जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान दर्ज एफआईआर पर सरकार ने वापसी का ऐलान कर दिया है. अदालत की मंजूरी ही तय करेगी कि छात्रों के केस सच में खत्म होंगे या फिर वादे अधूरे रह जाएंगे.

Student Protest FIR: 13 जून से 25 जुलाई 2026 तक जंतर-मंतर पर चले 36 दिन लंबे आंदोलन के दौरान सिर्फ दिल्ली में ही 15 से 20 FIR दर्ज होने का दावा किया गया. 20 जुलाई को संसद मार्च के बाद हालात और गरमाए और दिल्ली से बाहर कई राज्यों में भी प्रदर्शनकारियों पर केस दर्ज किए गए. सरकार ने इन मामलों को वापस लेने की सहमति जताई है, लेकिन सिर्फ घोषणा से FIR खत्म नहीं होती.

BNSS के तहत तय प्रक्रिया

1 जुलाई 2024 से लागू भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के मुताबिक एक बार FIR दर्ज हो जाए तो उसे खत्म करने के लिए अदालत की मंजूरी जरूरी होती है. सरकार चाहे या कोई आम नागरिक, केस रद्द करने का रास्ता सिर्फ न्यायालय से होकर ही गुजरता है. छात्रों पर दर्ज केस भी तभी खत्म होंगे जब अदालत कानूनी प्रक्रिया पूरी कर देगी.

कैबिनेट का फैसला सबसे पहला कदम

जब एक साथ कई केस वापस लेने हों, तो गृह विभाग की सिफारिश पर कैबिनेट नीतिगत निर्णय लेती है. इसके बाद सरकारी वकीलों को लिखित आदेश दिए जाते हैं कि वे अदालत में केस वापसी की अर्जी दाखिल करें.

अदालत में अर्जी और BNSS धारा 360

सरकारी वकील अदालत में BNSS की धारा 360 (पहले CrPC 321) के तहत केस वापसी की औपचारिक अर्जी दाखिल करते हैं. अदालत इस पर सुनवाई करती है और पीड़ित पक्ष को भी बुलाकर उसका पक्ष सुनती है.

पीड़ित पक्ष की सुनवाई

नए नियमों के अनुसार अदालत केस खत्म करने से पहले पीड़ित का बयान सुनना अनिवार्य करती है. अगर प्रदर्शन में सरकारी संपत्ति को नुकसान हुआ है तो संबंधित विभाग को अदालत में पेश होकर अपनी राय देनी पड़ती है.

अदालत की अंतिम मुहर

अंतिम फैसला जज का होता है. अगर अदालत मान ले कि केस वापसी जनहित में है तो FIR हमेशा के लिए रद्द हो जाती है.

अन्य कानूनी विकल्प

अगर मुख्य प्रक्रिया में अड़चन आती है तो तीन और रास्ते मौजूद हैं:

  • पुलिस क्लोजर रिपोर्ट: अगर चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है और सबूत कमजोर हैं तो पुलिस अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर सकती है.
  • हाईकोर्ट से राहत: BNSS की धारा 528 (पहले CrPC 482) के तहत हाईकोर्ट सीधे केस रद्द कर सकता है.
  • लोक अदालत का रास्ता: छोटे मामलों को लोक अदालत में ले जाकर एक ही दिन में खत्म किया जा सकता है.

किसान आंदोलन से सीख

2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान भी सरकार ने केस वापसी का वादा किया था. दिसंबर 2022 में राज्यसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार दिल्ली और चंडीगढ़ में दर्ज 86 केस खत्म किए गए. रेल मंत्रालय ने 34 केस वापस लिए और हरियाणा सरकार ने 294 में से 163 केस खत्म करने की अनुमति दी जिनमें से 98 केस अदालत से रद्द हुए.

किसानों का दावा

संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि आंदोलन के दौरान 1.48 लाख से ज्यादा FIR दर्ज हुई थीं. वादों के बावजूद पंजाब, हरियाणा और यूपी में आज भी हजारों केस पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं. किसान आज भी अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं.

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छात्रों के केस का भविष्य

छात्रों पर दर्ज केस वापसी का रास्ता आसान नहीं है. सरकार ने भले ही घोषणा कर दी हो, लेकिन अदालत की मंजूरी के बिना कोई केस खत्म नहीं होगा. किसान आंदोलन का अनुभव बताता है कि प्रक्रिया लंबी और जटिल है. अब देखना होगा कि सरकार कितनी तेजी से कानूनी कदम उठाती है और अदालतें कितनी जल्दी फैसला देती हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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