आयुर्वेद और पारंपरिक चाइनीज मेडिसिन को मिलेगी वैश्विक पहचान (AI IMAGE)
आयुर्वेद, योग और पारंपरिक चाइनीज मेडिसिन (TCM) जैसी प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को अब पूरी दुनिया में एक नया और वैज्ञानिक आधार मिलने जा रहा है. ब्रिक्स (BRICS) देशों के समूह ने इन पारंपरिक और वैकल्पिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर मानकीकृत (Standardise) करने की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू की है.
हाल ही में भारत में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलनों के दौरान सदस्य देशों ने एक विशेष ‘एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप’ बनाने पर सहमति जताई है. इसका मुख्य उद्देश्य प्राचीन उपचार तरीकों की पहचान खोए बिना उनके लिए सुरक्षा, गुणवत्ता और वैज्ञानिक अनुसंधान के साझा मानक तय करना है.
क्या है मानकीकरण?
अक्सर लोगों को लगता है कि मानकीकरण का मतलब आयुर्वेद या चाइनीज मेडिसिन को आधुनिक एलोपैथी में बदलना है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. इसका असली मकसद यह तय करना है कि दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाली जड़ी-बूटियों की गुणवत्ता कैसी है, उनका निर्माण सही तरीके से हो रहा है या नहीं, और क्या इलाज करने वाले डॉक्टर पूरी तरह प्रशिक्षित हैं.
सरल शब्दों में कहें तो, ‘प्राकृतिक’ होने का मतलब यह नहीं होता कि कोई दवा 100% जोखिम-मुक्त है. सही पैकेजिंग, सामग्री की पूरी जानकारी और लैब टेस्टिंग के जरिए मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना ही इस नीति का प्राथमिक लक्ष्य है.
चिकित्सा पर अभूतपूर्व राजनीतिक सहमति
जुलाई 2026 में चंडीगढ़ में आयोजित ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक से लेकर सितंबर 2026 में नई दिल्ली में हुए शिखर सम्मेलन तक, पारंपरिक चिकित्सा पर अभूतपूर्व राजनीतिक सहमति देखने को मिली. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इस दिशा में ब्रिक्स के प्रयासों की सराहना की है.
भारत का आयुर्वेद और चीन की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति दोनों ही मरीज के पूरे शरीर और जीवनशैली को ध्यान में रखकर इलाज करती हैं. अब डिजिटल प्लेटफॉर्म, एआई (AI) और रिसर्च डेटाबेस के जरिए इन पद्धतियों के असर का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा.
मरीजों के लिए जरूरी बातें?
अगर आप भी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों, हर्बल सप्लीमेंट्स या वैकल्पिक चिकित्सा का इस्तेमाल करते हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:
- एलोपैथिक दवाओं के साथ हर्बल दवाएं लेते समय अपने डॉक्टर को जरूर बताएं.
- ‘रातों-रात चमत्कार’ का दावा करने वाली फर्जी दवाओं से बचें.
- गंभीर बीमारियों या गर्भावस्था के दौरान बिना डॉक्टरी सलाह के वैकल्पिक उपचार शुरू न करें.
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-भारत एक्सप्रेस
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