Bharat Express DD Free Dish

Axiom-4 Mission: अंतरिक्ष में भारत की शुभ उड़ान! इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए ड्रैगन कैप्सूल से रवाना हुए कैप्टन शुभांशु शुक्ला

शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) ने एक वीडियो में कहा, “मैंने बचपन में उनके बारे में किताबों में पढ़ा और कहानियों में सुना. मैं उनसे बहुत प्रभावित हुआ.

Shubhanshu Shukla

Axiom-4 मिशन लॉन्च.

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला बुधवार यानी आज Axiom-4 मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए रवाना हो गए हैं. अंतरिक्ष का दौरा करने वाले शुभांशु शुक्ला दूसरे भारतीय बन गए हैं. शुभांशु शुक्ला स्पेस स्टेशन में 14 दिनों तक रहेंगे.

राकेश शर्मा की विरासत और Shubhanshu Shukla की उड़ान

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) के लिए यह मिशन उस विरासत का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत विंग कमांडर राकेश शर्मा ने की थी. शर्मा ने 3 अप्रैल 1984 को सोवियत इंटरकोस्मोस कार्यक्रम के अंतर्गत Soyuz T-11 अंतरिक्ष यान से Salyut 7 अंतरिक्ष स्टेशन तक यात्रा की थी.

राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष में योग और भारहीनता पर प्रयोग किए थे और अंतरिक्ष से भारत की तस्वीरें ली थीं. जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पूछा कि “भारत अंतरिक्ष से कैसा दिखता है?”, तो उन्होंने जवाब दिया, “सारे जहाँ से अच्छा” – यह वाक्य आज भारत की अंतरिक्ष गाथा का प्रतीक बन चुका है.

शुभांशु शुक्ला ने क्या कहा?

शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) ने एक वीडियो में कहा, “मैंने बचपन में उनके बारे में किताबों में पढ़ा और कहानियों में सुना. मैं उनसे बहुत प्रभावित हुआ. मुझे नहीं पता था कि मेरा जीवन मुझे इस दिशा में ले जाएगा, पर आज मैं इस मुकाम पर हूं. मैं खुद को बेहद सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे पहले एक पायलट बनने का अवसर मिला और अब एक अंतरिक्ष यात्री बनने का.”

यह भी पढ़ें- Axiom-4 Mission: भारत के लिए आज ऐतिहासिक दिन, अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरेंगे कैप्टन शुभांशु शुक्ला

Axiom-4 मिशन में 60 वैज्ञानिक प्रयोग शामिल हैं, जो 31 देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनमें भारत, अमेरिका, पोलैंड, हंगरी, सऊदी अरब, ब्राज़ील, नाइजीरिया, यूएई और यूरोप के कई देश शामिल हैं. यह अब तक के सभी Axiom Space मिशनों में सबसे अधिक वैज्ञानिक अनुसंधान आधारित मिशन है. इसका उद्देश्य लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में माइक्रोग्रैविटी स्थितियों में अनुसंधान को आगे बढ़ाना है. इसमें विशेष रूप से मानव शरीर पर प्रभाव, पृथ्वी का अवलोकन, जैविक और पदार्थ विज्ञान संबंधी शोध शामिल हैं. यह मिशन भारत, पोलैंड (ESA के साथ साझेदारी में), हंगरी और अमेरिका द्वारा वैज्ञानिक रूप से अग्रणी प्रयास है.

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read