प्रतीकात्मक फोटो.
Delhi High Court: साल 2020 में दिल्ली में तब्लीगी जमात से जुड़े 70 भारतीयों पर कोविड-19 फैलाने का आरोप लगे और कई मामलों में केस भी दर्ज किए गए. अब पांच साल से भी ज़्यादा समय बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (17 जुलाई) को 16 FIR और उसके बाद की कार्यवाहियों, जिनमें इन मामलों में आरोपपत्र भी शामिल हैं, में आरोपों को रद्द कर दिया.
कोर्ट के पूरे फैसले का अभी पब्लिक में आना बाकि है, लेकिन जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने खुली अदालत में घोषणा की कि कार्यवाही रद्द कर दी गई है.
16 FIR में नामजद 70 आरोपियों पर 24 मार्च, 2020 से 30 मार्च, 2020 के बीच कोविड महामारी के दौरान अलग-अलग मस्जिदों में विदेशी नागरिकों को ठहराने के लिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे, जिनमें आपराधिक साजिश भी शामिल है.
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इन प्राथमिकियों में 195 विदेशी नागरिकों के नाम थे, हालांकि, ज्यादातर आरोपपत्रों में उन्हें आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया था, या मजिस्ट्रेट अदालत ने दोहरे खतरे के सिद्धांत (एक ही मामले के लिए दो बार सजा) पर चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था.
सरकार ने 950 से ज्यादा विदेशियों को कर दिया था ब्लैकलिस्ट
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शुरुआत में महामारी रोग अधिनियम, 1897 की धारा 3, भारतीय दंड संहिता की धारा 188, 269, 270, 120-बी और 271 के साथ-साथ आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के तहत सात भारतीयों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी.
इसके बाद क्राइम ब्रांच ने 955 विदेशी नागरिकों के खिलाफ 48 चार्जशीट और 11 सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर किए, जिनमें विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14(बी) के तहत चार्जशीट भी शामिल हैं, जिनमें से 911 ने मजिस्ट्रेट अदालत में प्ली बार्गेन दायर किए.
बाद में चांदनी महल पुलिस स्टेशन सहित दिल्ली भर में 193 विदेशी और भारतीय नागरिकों के खिलाफ इसी तरह के अपराधों के लिए 28 अन्य मामले दर्ज किए गए. मजिस्ट्रेट अदालत ने भारतीय नागरिकों के खिलाफ चांदनी महल पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी के चार्जशीट पर संज्ञान लिया था.
अप्रैल की शुरुआत में भारत में कोविड-19 महामारी के प्रकोप के साथ एक अंतरराष्ट्रीय मुस्लिम मिशनरी समूह, तब्लीगी जमात पर मेडिकल इमरजेंसी को बढ़ाने का आरोप लगाया गया था.
तब देश के कई नेताओं ने तब्लीगी जमात (Tablighi Jamaat) पर कोविड की स्थिति को और बिगाड़ने का आरोप लगाया था और सरकार ने 950 से ज़्यादा विदेशी नागरिकों को ब्लैक लिस्ट कर दिया था. उन पर दिल्ली स्थित जमात के मरकज़ में एक सभा में भाग लेकर आपातकालीन नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था.
-भारत एक्सप्रेस
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