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केंद्र सरकार ने लॉन्च किया ‘उम्मीद’ पोर्टल, अब छह महीने में कराना होगा सभी वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण

केंद्र सरकार ने ‘उम्मीद’ पोर्टल लॉन्च किया है, जिसके तहत देशभर की वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण छह महीनों में अनिवार्य कर दिया गया है. यह पोर्टल पारदर्शिता, जवाबदेही और डिजिटल सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा.

Kiran Rijiju
Edited by Akansha

वक्फ पर केंद्र सरकार ने एक कदम और बढ़ाया. 6 जून को “उम्मीद” उम्मीद’ यानी Unified Waqf Management, Empowerment, Efficiency, and Development Act (एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास कानून) पोर्टल लॉन्च किया. इस पोर्टल के जरिए देशभर की वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण किया जाएगा, साथ ही पहचान के लिए चुनाव आयोग के डेटा का सहारा लिया जाएगा. इसके तहत सभी वक्फ संपत्तियों को 6 महीनों के भीतर पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा. “उम्मीद” का उद्देश्य लाभार्थियों को उनके अधिकारों तक डिजिटल पहुंच प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाना है, साथ ही लंबे समय से चले आ रहे संपत्ति विवादों को सुलझाना और जवाबदेही बढ़ाना भी है.

वक्‍फ कानून के मुताबिक वक्फ संपत्तियों का पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य होगा. ऐसा वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के मकसद से किया गया है. शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने “उम्मीद” पोर्टल की शुरुआत की. इस मौके पर अन्य राज्यों से भी सचिव और वक्फ बोर्ड के अधिकारी भी वर्चुअली मौजूद रहे.

सरकार ऐसे वक्‍त में यह पोर्टल लॉन्‍च करने जा रही है जब सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा है.

एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995 के उद्देश्यों के लिए UMEED सेंट्रल पोर्टल स्थापित किया गया है. इस पोर्टल का उद्देश्य धारा 3B के तहत वक्फ के विवरण का दाखिल करना, धारा 5 के तहत औकाफ की सूची का अपलोड करना, धारा 36 के तहत नए वक्फ का पंजीकरण, धारा 37 के तहत औकाफ के रजिस्टर का रखरखाव और धारा 46 के तहत एक वक्फ के मुतवल्ली के खातों का रखरखाव और प्रस्तुतीकरण, धारा 47 के तहत ऑडिट रिपोर्ट का प्रकाशन और धारा 48 के तहत बोर्ड की कार्यवाही और आदेश का प्रकाशन है.

पोर्टल की मुख्य विशेषताएं

1. पोर्टल एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995 के प्रावधानों के अनुसार है.
2. मोबाइल नंबर/ईमेल आधारित लॉगिन ओटीपी सत्यापन के माध्यम से.
3. डेटा अखंडता सुनिश्चित करने और अनधिकृत प्रविष्टियों को रोकने के लिए तीन स्तरीय उपयोगकर्ता यानी मेकर-चेकर-अनुमोदक.
– मेकर एक मुतवल्ली या राज्य/केंद्र शासित प्रदेश वक्फ बोर्ड द्वारा अधिकृत कोई व्यक्ति होगा.
– चेकर एक जिला स्तरीय अधिकारी या राज्य/केंद्र शासित प्रदेश वक्फ बोर्ड द्वारा अधिकृत कोई अधिकारी होगा; और
– अनुमोदक सीईओ या राज्य/केंद्र शासित प्रदेश वक्फ बोर्ड द्वारा अधिकृत कोई अन्य अधिकारी होगा.
4. डेटा गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ड्रॉपडाउन के माध्यम से संरचित इनपुट.
5. स्थानीय शासन निर्देशिका (एलजीडी) कोड का एकीकरण.
6. वक्फ और वक्फ के तहत संपत्तियों के पंजीकरण के लिए एकल चरण प्रक्रिया.
7. प्रत्येक वक्फ संपत्ति के लिए एक 17-अंकीय विशिष्ट आईडी पोर्टल द्वारा विवरण के आधार पर उत्पन्न की जाती है, जो एक केंद्रीकृत और पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड को सक्षम करती है जो वक्फ संपत्तियों की स्थिति, स्वामित्व और उपयोग को ट्रैक करने में दक्षता में सुधार करेगी.
8. पोर्टल पर वक्फ के विवरण दाखिल करने के लिए उपयोगकर्ताओं का समर्थन करने के लिए केंद्रीकृत टोल-फ्री हेल्पलाइन.
9. पोर्टल पर अपलोड किए गए व्यक्तिगत और वक्फ संपत्ति डेटा का संरक्षण मौजूदा डेटा संरक्षण और गोपनीयता कानूनों द्वारा शासित होगा.

पूरे देश में जुड़े हुए लोग हैं हमारे मुसलमान समुदाय के लोग हैं बधाई देना चाहता हूं. यह बहुत बड़ा कदम है प्रधान मंत्री जी ने कहा है कि यहां आजादी के बाद हमारे देश में बहुत बड़ा काम यह वक्त संशोधन ने किया है यह काम करोड़ों लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए बहुत बड़ा कदम है कोई आसान कम नहीं है इसके लिए पूरे स्टेट होल्डर से बात किया पार्लियामेंट्री कमिटी में जेपीसी बनाकर राज्य सरकारों से बोर्ड से सबसे चर्चा कराया और पार्लियामेंट में रिकॉर्ड चर्चा हुई इतिहास में सबसे लंबी चर्चा होगी.

कानून बनने के बाद हमने कहा था कि हम इसके इंप्लीमेंटेशन में देरी नहीं करेंगे इसको इंप्लीमेंटेशन मोड पर ले जाएंगे तो आज वक्फ कानून में आज सबसे पहला कदम शुरू हो गया है सेंट्रल पोर्टल के जरिए किस तरीके से प्रियदर्शी तरीके से काम करेगा. Efficiency empowerment के जरिए मुस्लिम तबकों के गरीबों का भला करेगा. मैं राज्य सरकारों और वक्फ बोर्ड से अपील करूंगा इसको समय से मानते हुए पूरा करे, नहीं तो बाद मे दिक्कत होगी. अब ये कानून बन चुका हैं अब सब मिल कर सहयोग करे. ये सबका साथ सबका विकास इस एक्ट में झलकता है. जब इतनी प्रॉपर्टी है तो करोड़ों मुस्लिम समुदाय के लोग गरीब क्यों रहेंगे.

-भारत एक्सप्रेस 



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