भारत सरकार सर्वाइकल कैंसर रोकथाम के लिए एचपीवी टीकाकरण और जांच अभियान चला रही है, जिसके तहत 30 साल से अधिक उम्र की 10.18 करोड़ महिलाओं की आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में जांच की गई ताकि समय पर पहचान और इलाज से महिलाओं में कैंसर से बचाव हो सके।
भारत में सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) और इससे होने वाली मौतों को रोकने के लिए सरकार लगातार कोशिश कर रही है. सरकार ने संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) के दौरान जानकारी दी कि भारत में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर यानी सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) और इससे होने वाली मौतों को रोकने के लिए अब तक देशभर में 30 साल या उससे अधिक उम्र की 10.18 करोड़ से ज्यादा महिलाओं की जांच की जा चुकी है.
कहां की गई जांच ?
यह जांच आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (AAM) में की गई, जो सरकार की ओर से शुरू किए गए स्वास्थ्य केंद्र हैं.
भारत में कितनी मौतें
बता दें कि दुनिया भर में सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतों में से 25 प्रतिशत भारत में होती हैं. इसका मुख्य कारण जानकारी देर से मिलना और फिर इलाज भी देर से शुरू होना है.
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री ने क्या कहा ?
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव (Prataprao Jadhav) ने कहा,
”20 जुलाई तक, नेशनल एनसीडी पोर्टल के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में 30 साल या उससे ज्यादा उम्र की कुल 25.42 करोड़ महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें कैंसर की जांच की जरूरत है. अब तक 10.18 करोड़ महिलाओं की जांच हो चुकी है. उन्होंने आगे कहा ये आंकड़े दिखाते हैं कि सरकार आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के जरिए लोगों को बीमारी से पहले ही बचाने और जांच करने की सुविधा दे रही है.”
जांच के पीछे का उद्देश्य
यह उपलब्धि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत एक बड़े कार्यक्रम का हिस्सा है, जो पूरे देश की आबादी के लिए चलाया जा रहा है. इसका मकसद जांच करना, बीमारी को रोकना और इलाज करना है.
यह योजना 30 से 65 साल की महिलाओं के लिए-जाधव
वहीं प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में बताया कि,
”यह योजना 30 से 65 साल की महिलाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है. इन महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर की जांच वीआईए (विजुअल इंस्पेक्शन विद एसिटिक एसिड) नाम की एक आसान और सस्ती जांच विधि से की जाती है. यह जांच आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के तहत बने सब-हेल्थ सेंटर और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में की जाती है. अगर किसी महिला की रिपोर्ट वीआईए पॉजिटिव आती है, तो उसे बड़े अस्पतालों में भेजा जाता है, जहां उसकी आगे की जांच और इलाज होता है.”
आशा कार्यकर्ता भी जागरूक अभियान में
सरकार ने गांव और छोटे इलाकों में सर्वाइवल कैंसर को रोकने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को भी जोड़ा है, जो घर-घर जाकर महिलाओं की जांच के लिए उन्हें जागरूक करती हैं और जांच कराने में मदद करती हैं, ताकि बीमारी समय पर पकड़ी जा सके और रोकी जा सके.
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-भारत एक्सप्रेस
(साभार IANS न्यूज एजेंसी)
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