रिपोर्ट-अभिषेक
Chandrapur Mahavitaran electricity disconnection dispute: मार्च का महीना खत्म होने से पहले बिजली बिल वसूली का टारगेट पूरा करने के लिए महावितरण के कर्मचारी इन दिनों आपा खोते नजर आ रहे हैं. ताजा मामला महाराष्ट्र के चंद्रपुर शहर के भिवापुर स्थित प्रांतीय कॉलोनी का है, जहाँ ‘मार्च एंडिंग’ के दबाव में एक कर्मचारी ने नियम-कायदों को ताक पर रखकर एक ग्राहक के घर की बिजली काट दी. लेकिन उसे अंदाजा नहीं था कि उसका पाला एक ऐसे जागरूक नागरिक से पड़ेगा, जो न सिर्फ डरा बल्कि उसने बीच सड़क पर कर्मचारी को कानून का पाठ पढ़ा दिया.
क्या था पूरा विवाद?
प्रांतीय कॉलोनी के निवासी प्रवीण प्रदीप रॉय, जो फुटपाथ पर अपनी दुकान चलाकर परिवार का गुजारा करते हैं, उन्हें फरवरी और मार्च का कुल 3,900 रुपये का बिजली बिल मिला था. प्रवीण का कहना है कि वे बिल भरने की आखिरी तारीख (31 मार्च) से पहले भुगतान करने वाले थे. लेकिन 17 मार्च को ही महावितरण का कर्मचारी उनके घर पहुंच गया और बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली काट दी. हैरान करने वाली बात यह थी कि कर्मचारी ने खंभे से कनेक्शन काटने के बजाय सीधे बिजली के मीटर से ही सप्लाई बंद कर दी, जो नियमों के खिलाफ है.
सवालों की बौछार से कैसे पस्त हुआ कर्मचारी?
जब प्रवीण को इस मनमानी का पता चला, तो उन्होंने भाग रहे कर्मचारी को पकड़ लिया और सवालों की झड़ी लगा दी. प्रवीण ने तर्क दिया कि जब बिल भरने की आखिरी तारीख 31 मार्च है, तो 17 तारीख को ही बिजली क्यों काटी गई? और अगर देरी होती भी है, तो विभाग के पास जमा ‘सिक्योरिटी डिपॉजिट’ किस काम का है? उससे पैसे क्यों नहीं काटे जाते?” प्रवीण के तार्किक विरोध और वीडियो बनता देख कर्मचारी के हाथ-पांव फूल गए. दबाव बढ़ता देख कर्मचारी को अपनी गलती माननी पड़ी और उसने तुरंत प्रवीण के घर की बिजली सप्लाई बहाल कर दी.
ये भी पढ़ें-इजरायल हमले में ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी की मौत, सुप्रीम लीडर के बाद बड़ा झटका
पीड़ित ग्राहक ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद शहर के अन्य बिजली ग्राहकों में भी भारी रोष है. प्रवीण रॉय ने साफ कर दिया है कि वे इस मानसिक प्रताड़ना और विभाग की तानाशाही के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे और मामले को कोर्ट तक ले जाएंगे. आम लोगों का आरोप है कि महावितरण के अधिकारी वसूली का टारगेट पूरा करने के लिए गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को निशाना बना रहे हैं, जबकि बड़े बकायेदारों पर हाथ डालने से बचते हैं.
क्या कहता है नियम?
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, बिजली बिल न भरने की स्थिति में भी विभाग को कनेक्शन काटने से पहले कम से कम 15 दिन का लिखित नोटिस देना अनिवार्य है. साथ ही भुगतान की अंतिम तिथि से पहले कार्रवाई करना पूरी तरह अवैध है. चंद्रपुर की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर नागरिक अपने अधिकारों के प्रति सजग हों, तो सरकारी तंत्र की मनमानी को रोका जा सकता है.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



