कूनो पार्क में ज्वाला ने जन्मे 5 शावक
India’s Project Cheetah: मध्य प्रदेश में कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर खुशखबरी आई है. नामीबिया से लाई गई मादा चीता ज्वाला ने तीसरी बार मां बनकर पांच शावकों को जन्म दिया है. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट चीता के लिए बड़ा मील का पत्थर है. अब भारत में चीतों की कुल संख्या 53 हो गई है. ज्वाला और उसके शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं. पार्क के अधिकारी उनकी देखभाल कर रहे हैं. यह ज्वाला की तीसरी डिलीवरी है. इससे पहले भी उसने शावकों को जन्म दिया था.
Good News from Kuno National Park again…
Cheetah Jwala has given birth to 5 cubs, marking another major milestone for Project Cheetah. With this, India’s cheetah population has crossed the half-century mark, reaching 53.
A proud moment for wildlife conservation and a strong… pic.twitter.com/UfZz64zpJ6
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) March 9, 2026
वीडियो में दिखे चीते के नन्हे शावक
एक्स पर शेयर किए गए वीडियो में ज्वाला को घास में लेटे हुए दिखाया गया है. उसके पांच छोटे शावक उसके पेट से चिपके हुए दूध पी रहे हैं. शावक बहुत छोटे और प्यारे लग रहे हैं. ज्वाला शांत बैठी है और शावकों की देखभाल कर रही है. यह वीडियो पार्क के कैमरों से लिया गया है. इससे चीता प्रोजेक्ट की सफलता साफ दिखती है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी एक्स पर बधाई दी. उन्होंने कहा कि यह भारत की वन्यजीव संरक्षण के लिए गर्व का पल है. अब भारत में पैदा हुए जीवित शावकों की संख्या 33 हो गई है. यह भारत की मिट्टी पर 10वीं सफल डिलीवरी है.
भारत में चीतों की तादाद और जगह
इस जन्म के साथ भारत में चीतों की कुल संख्या 53 पहुंच गई है. ये सभी चीते मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में रखे गए हैं. पार्क श्योपुर जिले में है, जो ग्वालियर के पास है. यहां चीतों के लिए बड़ा क्षेत्र है. वे यहां आराम से रह रहे हैं. पार्क के अधिकारी चीतों की सेहत पर नजर रखते हैं. कभी-कभी शावक गांव की तरफ चले जाते हैं, लेकिन उन्हें वापस लाया जाता है. प्रोजेक्ट चीता के तहत चीतों को यहां बसाया गया है. भविष्य में दूसरे पार्कों में भी चीते ले जाए जा सकते हैं, लेकिन अभी सभी कूनो में हैं.
देश में चीतों को कहां से लाया गया?
भारत में चीते नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से लाए गए थे. सबसे पहले 2022 में नामीबिया से 8 चीते लाए गए. फिर 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते आए. हाल ही में फरवरी 2026 में बोत्सवाना से 9 चीते कूनो पहुंचे. ज्वाला नामीबिया से आई थी. ये चीते अफ्रीका से लाए गए क्योंकि भारत में चीते 70 साल पहले विलुप्त हो गए थे. प्रोजेक्ट चीता के जरिए उन्हें दोबारा बसाया जा रहा है. अब भारत में पैदा हो रहे शावक इस प्रोजेक्ट की सफलता दिखाते हैं. सरकार और वन अधिकारी मिलकर काम कर रहे हैं. इससे वन्यजीवों की रक्षा हो रही है.
चीता प्रोजेक्ट की क्या चुनौतियां?
प्रोजेक्ट चीता में कुछ चुनौतियां भी आईं. गर्मी में कुछ शावक मर गए थे. लेकिन अब चीते भारतीय मौसम में ढल रहे हैं. ज्वाला जैसी मादाएं बार-बार शावक दे रही हैं. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह वन्यजीव संरक्षण की मजबूत गवाही है. मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे ऐतिहासिक बताया. विशेषज्ञ कहते हैं कि चीतों की संख्या बढ़ने से प्रोजेक्ट सफल हो रहा है. आम लोग भी खुश हैं. यह खबर वन प्रेमियों के लिए प्रेरणा है. सरकार आगे भी ऐसे प्रयास जारी रखेगी.
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अपडेट्स- अजय भटनागर, मध्य प्रदेश.
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