Money Laundering Case: महाराष्ट्र के मंत्री और एनसीपी नेता छगन भुजबल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक बड़े मामले में राहत मिली है. कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है. यह मामला महाराष्ट्र सदन घोटाले से जुड़ा था, जिसमें भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे थे.
यह है मामला
यह मामला 2005 के महाराष्ट्र सदन निर्माण से जुड़ा है. उस समय छगन भुजबल लोक निर्माण विभाग के मंत्री थे. आरोप था कि दिल्ली में नया महाराष्ट्र सदन बनाने का ठेका बिना टेंडर के एक निजी कंपनी को दिया गया. इससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ और रिश्वत ली गई. ईडी ने 2016 में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत केस दर्ज किया था. इसमें भुजबल, उनके परिवार और ठेकेदार चमनकर बंधुओं का नाम आया था.
कोर्ट से बड़ी राहत
बॉम्बे हाई कोर्ट ने पहले चमनकर बंधुओं के खिलाफ ईडी के आरोप खारिज कर दिए थे. सितंबर 2025 में कोर्ट ने कहा कि मूल भ्रष्टाचार केस (एसीबी केस) में 2021 में उन्हें बरी किया जा चुका था. यह फैसला अंतिम हो गया था. इसलिए मनी लॉन्ड्रिंग का केस नहीं चल सकता. अब इसी आधार पर छगन भुजबल को भी इस मामले में पूरी तरह बरी कर दिया गया है. कोर्ट ने ईडी की चार्जशीट को खारिज किया.
केस की मौजूदा स्थिति
भुजबल को 2018 में बॉम्बे हाई कोर्ट से जमानत मिली थी. जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें जमानत रद्द करने की मांग थी. अब कोर्ट की इस नई राहत से भुजबल की मुश्किलें खत्म हो गई हैं. वे अब इस केस से मुक्त हैं. हालांकि कुछ अन्य पुराने केस अलग चल रहे हैं, लेकिन इस मुख्य ईडी मामले में उन्हें क्लीन चिट मिल गई है.
छगन भुजबल की राजनीति
छगन भुजबल महाराष्ट्र सरकार में मंत्री हैं. वे अजीत पवार गुट के एनसीपी से जुड़े हैं. यह फैसला उनके लिए राजनीतिक रूप से मजबूती लाएगा. लंबे समय से चल रहे इस केस ने उनकी छवि पर असर डाला था, लेकिन अब कोर्ट की राहत से वे राहत की सांस ले सकते हैं.
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