Operation Bluestar: कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने हाल ही में ऑपरेशन ब्लू स्टार को लेकर बयान दिया, जिसके बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. चिदंबरम ने हिमाचल के कसौली में कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार एक गलत तरीका था और इंदिरा गांधी ने इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकाई. उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला अकेले इंदिरा गांधी का नहीं था बल्कि सभी विभागों का साझा निर्णय था.
चिदंबरम पर झूठ बोलने का आरोप
SGPC ने चिदंबरम के बयान का स्वागत तो किया, लेकिन साथ ही उन पर झूठ बोलने का आरोप लगाया. SGPC का कहना है कि ऑपरेशन ब्लू स्टार इंदिरा गांधी का निजी फैसला था, न कि सेना, पुलिस या खुफिया एजेंसियों का साझा निर्णय. उन्होंने कहा कि देर आए दुरुस्त आए, लेकिन अभी भी झूठ बोल रहे हैं.
दोहरी नीति पर उठाए सवाल
SGPC ने कांग्रेस की दोहरी नीति पर भी सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि अगर कांग्रेस अपनी गलती मानती है, तो राहुल गांधी जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार जैसे नेताओं पर क्यों नहीं बोलते? उल्टा वे उनके साथ बैठते हैं. बता दें कि इन दोनों नेताओं पर 1984 के सिख विरोधी दंगों में भूमिका निभाने के आरोप लगे थे.
कब हुआ था ऑपरेशन ब्लू स्टार?
ऑपरेशन ब्लू स्टार की बात करें तो यह जून 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में हुआ था. उस समय जरनैल सिंह भिंडरावाले और उनके समर्थक मंदिर में छिपे हुए थे. वे पंजाब को भारत से अलग करना चाहते थे. इंदिरा गांधी की सरकार ने सेना भेजकर उन्हें हटाने का फैसला लिया. इस कार्रवाई में स्वर्ण मंदिर को नुकसान पहुंचा, जिससे सिख समुदाय में भारी गुस्सा फैल गया.
इंदिरा गांधी की हत्या
इसी गुस्से के चलते अक्टूबर 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या उनके दो सिख सुरक्षाकर्मियों ने कर दी. इसके बाद दिल्ली और अन्य शहरों में सिखों के खिलाफ भयानक दंगे हुए जिनमें हजारों बेगुनाह सिख मारे गए. कांग्रेस नेताओं पर इन दंगों को भड़काने के आरोप लगे.
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-भारत एक्सप्रेस
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