CJP Protest Crime Data: नीट में अनियमितताओं को लेकर देश की राजधानी दिल्ली की सड़कों पर शुरू हुआ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन अपने शुरुआती दिनों से ही जांच एजेंसियों के निशाने पर था. जंतर-मंतर पर शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन धर्मेंद्र प्रधान के इसेतीफे के बाद खत्म हो गया. हालांकि, इसकी चर्चा अभी भी जारी है. क्योंकि सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के खिलाफ भड़काऊ व अभद्र टिप्पणियां करने के गंभीर आरोप लगे. अब आंदोलन खत्म होते ही दिल्ली पुलिस के खुलासे ने पूरे देश को चौंका दिया है.
आंदोलन के खौफनाक सच ने इसे केवल एक ‘छात्र आंदोलन’ मानने से इनकार कर दिया है. फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) और अत्याधुनिक तकनीकी उपकरणों के जरिए दिल्ली पुलिस द्वारा खंगाले गए डेटा में यह बात सामने आई है कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ में केवल छात्र ही नहीं, बल्कि संगीन जुर्मों के सैकड़ों वांछित आरोपी भी मौजूद थे.
आंदोलन में गंभीर मामलों के आरोपी (CJP Protest Crime Data)
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) से स्कैन किए गए आंकड़ों में 2,873 लोगों का क्रिमिनल बैकग्राउंड सामने आया है, जिनमें से 989 पर अति-संवेदनशील और गंभीर आपराधिक केस दर्ज हैं.
| अपराध का प्रकार | संख्या |
| हत्या | 101 |
| हत्या का प्रयास | 62 |
| लूट और डकैती | 284 |
| दुष्कर्म | 61 |
| पॉक्सो एक्ट | 6 |
| महिलाओं के खिलाफ अपराध | 25 |
| आर्म्स एक्ट | 229 |
| झपटमारी | 135 |
| अपहरण | 19 |
| एनडीपीएस एक्ट | 67 |
विवादों के घेरे में रहा CJP का आंदोलन (CJP Jantar Mantar protest)
जंतर-मंतर पर धरना शुरू होने के साथ ही यह आंदोलन जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया था. पुलिस ने जंतर-मंतर और 20 जुलाई के मार्च के दौरान प्रधानमंत्री और संवैधानिक पदों के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट एवं वीडियो फैलाने के मामले में कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को कानूनी नोटिस थमाए थे.
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20 जुलाई को जब CJP ने संसद की ओर रुख किया, तो पुलिस बल और प्रदर्शनकारियों के बीच भयंकर झड़प हुई. इस खूनी हिंसा में स्पेशल कमिश्नर, जॉइंट कमिश्नर, डीसीपी और महिला पुलिसकर्मियों सहित 118 से अधिक पुलिस अधिकारी घायल हो गए थे. वहीं करीब 60 प्रदर्शनकारी भी घायल हुए थे.
विभिन्न राज्यों में ताबड़तोड़ कार्रवाई (FRS Scan CJP Protest)
25 जुलाई की शाम शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और कानूनी आश्वासन के बाद आंदोलन भले ही खत्म हो गया, लेकिन इसके बाद असम, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे विभिन्न राज्यों में संदिग्ध तत्वों पर कार्रवाई शुरू हो गई. सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले आरोपियों पर केस दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
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अपराधियों का ढाल बनना चिंताजनक (CJP protest violence Delhi)
CJP का यह प्रदर्शन भले ही छात्रों की मांगों को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन 2,873 अपराधियों की मौजूदगी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या जन-आंदोलनों का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था को चुनौती देने के लिए किया जा रहा है? 118 पुलिसकर्मियों का घायल होना और 101 हत्या के आरोपियों का भीड़ में शामिल होना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है. अब देखना होगा कि जांच एजेंसियां इस पूरे तंत्र के पीछे छिपे मास्टरमाइंड्स तक कब तक पहुंच पाती हैं.
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