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क्या यही है स्वच्छता का मॉडल? महीनों से कर रहे थे शिकायत, अब मटमैले पानी ने ले ली जान; सोता रहा नगर निगम

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से दर्जनों लोग बीमार पड़ गए हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अस्पताल पहुंचे, वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी पूरे घटनाक्रम पर संज्ञान लिया है.

रिपोर्ट- जय व्यास


जिसे हम देश का सबसे साफ-सुथरा शहर कहते हैं, वहां से एक ऐसी खबर आई है जिसने नगर निगम के दावों पर सवालिया निशान लगा दिया हैं. मध्य प्रदेश के नेता और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के अपने विधानसभा क्षेत्र, भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने की वजह से दर्जनों लोग बीमार पड़ गए हैं. हालात इतने बिगड़ गए कि कई लोगों को आनन-फानन में निजी अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा, वहीं कई लोग घरों में ही रहकर इलाज कराने को मजबूर हैं.

हैरानी की बात यह है कि यह मुसीबत अचानक नहीं आई. स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से नगर निगम को गंदे पानी की सप्लाई के बारे में शिकायत कर रहे थे. नलों से मटमैला और बदबूदार पानी आ रहा था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. नतीजा यह हुआ कि दूषित पानी पीते ही लोगों को उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत होने लगी और देखते ही देखते भागीरथपुरा के कई घरों में मातम जैसा माहौल हो गया.

अस्पताल पहुंचे मंत्री विजयवर्गीय

जब अपनी ही विधानसभा में लोगों के बीमार होने की खबर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तक पहुंची, तो वे खुद को रोक नहीं पाए. सोमवार देर रात वे सीधे अस्पताल पहुंचे और मरीजों का हालचाल जाना. बेड पर लेटे बीमार बच्चों और बुजुर्गों को देखकर उन्होनें  तुरंत डॉक्टरों को बेहतर इलाज के निर्देश दिए.

मीडिया से बात करते हुए विजयवर्गीय ने कहा, “फिलहाल हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि हर बीमार व्यक्ति को सही इलाज मिले और वह जल्दी ठीक होकर घर लौटे. यह चूक कैसे हुई, पानी गंदा क्यों आया और इसके लिए कौन जिम्मेदार है. ये सब जांच का विषय है. हम सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो.”

मुख्यमंत्री ने भी लिया संज्ञान

मामला हाई-प्रोफाइल होने और बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने के कारण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस पर तुरंत एक्शन लिया है. सीएम ने इंदौर कलेक्टर से फोन पर बात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों को इलाज में कोई कमी नहीं आनी चाहिए.

स्वच्छता के ‘नंबर वन’ टैग पर सवाल?

इंदौर साल दर साल स्वच्छता में रिकॉर्ड बना रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर सीवेज और पीने के पानी की लाइनों का आपस में मिल जाना एक पुरानी समस्या रही है. भागीरथपुरा की इस घटना ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है. अब देखना यह होगा कि जांच के बाद किन अधिकारियों पर गाज गिरती है और क्या नगर निगम अपनी इस बड़ी लापरवाही से कोई सबक लेता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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