Delhi heat wave: दिल्ली इन दिनों झुलसाने वाली गर्मी से जूझ रही है. मई आते ही कई इलाकों में जमीन की सतह का तापमान 60 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की रिपोर्ट में जारी हीट मैप ने दिखाया कि हर जगह गर्मी का असर एक जैसा नहीं है.
असमानता की कहानी
कुछ हिस्से आग की तरह तप रहे हैं, जबकि कुछ जगहों पर थोड़ी राहत है. यह फर्क सिर्फ मौसम का नहीं बल्कि शहरीकरण, गरीबी और बुनियादी सुविधाओं की कमी का भी है.
हीट मैप की तस्वीर
हीट मैप में लाल और गहरे नारंगी रंग वाले इलाके सबसे ज्यादा गर्म दिखे, जहां तापमान 53 से 60 डिग्री तक दर्ज हुआ. वहीं पीले और हरे रंग वाले हिस्से अपेक्षाकृत ठंडे रहे. मई 2024 में दिल्ली का औसत लैंड सरफेस तापमान 48.46 डिग्री सेल्सियस रहा.
बाहरी इलाकों पर ज्यादा असर
करीब दो-तिहाई वार्ड्स में तापमान 45 डिग्री से ऊपर रहा. खासकर उत्तर-पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम और पूर्वी दिल्ली के इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए. तेजी से हो रहे निर्माण और कंक्रीट की सतहों ने इन जगहों को भट्ठी बना दिया है.
शहरीकरण और गर्मी
दिल्ली की गर्मी का यह रूप इंसानी गतिविधियों से भी जुड़ा है. कंक्रीट की सतहें दिन में सूरज की गर्मी सोख लेती हैं और रात में छोड़ती हैं, जिससे रातें भी गर्म रहती हैं. औद्योगिक क्षेत्र, भारी वाहन और एयर कंडीशनरों का इस्तेमाल इस समस्या को और बढ़ा रहे हैं.
गरीब इलाकों पर सबसे ज्यादा असर
बाहरी इलाकों में निर्माण कार्य और हरियाली की कमी ने हालात बिगाड़ दिए हैं. गरीब आबादी वाले हिस्से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. अप्रैल-मई की सूखी गर्मी और जून-जुलाई की उमस लोगों के लिए असहनीय हो जाती है.
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गोवा का हाल
दिल्ली की तरह ही गोवा भी अपने मौसम और भौगोलिक पहचान के लिए जाना जाता है. अरब सागर के किनारे बसे गोवा ने पुर्तगाली शासन से आज़ादी पाकर 1987 में राज्य का दर्जा हासिल किया. आज यह पर्यटन और उद्योग में अग्रणी है. वहीं दिल्ली का हीट आइलैंड इफेक्ट दिखाता है कि शहरीकरण अगर संतुलित न हो तो प्राकृतिक परिस्थितियां कितनी चुनौतीपूर्ण बन सकती हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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