राऊज एवेन्यु कोर्ट ने 1984 सिख विरोधी दंगे के मामले में दोषी करार दिए गए कांग्रेस के नेता सज्जन कुमार की सजा को लेकर पुलिस ने लिखित जवाब दाखिल कर फांसी की सजा की मांग की है. वहीं पीड़ितों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एच एस फुल्का ने भी फांसी की सजा की मांग की. दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील ने कहा कि 17 फरवरी को निचली अदालत में हड़ताल के चलते वो आज बहस नहीं कर सकते है.
स्पेशल जज काबेरी बावेजा ने सजा पर बहस के लिए 21 फरवरी की तारीख तय की है. कोर्ट ने 41 साल बाद इस मामले में सज्जन कुमार को दोषी करार दिया है. पिछले दिनों कोर्ट ने सभी पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.
जसवंत सिंह और तरुणदीप सिंह की हत्या से संबंधित मामला
मामले की सुनवाई के दौरान स्पेशल पीपी ने कोर्ट को बताया था कि मामले में दोबारा जांच के बाद क्या सबूत हाथ लगा है. सिख विरोधी दंगों के दौरान दिल्ली के सरस्वती विहार में दो सिखों की हत्या कर दी गई थी. यह मामला कोर्ट ने एक नवंबर को 1984 में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या से संबंधित बताया है. मामले की सुनवाई के दौरान सज्जन कुमार की ओर से पेश वकील ने कहा था कि सज्जन कुमार का नाम शुरू में नही था फिर उसके बाद इस मामले में 16 साल बाद सज्जन कुमार का नाम सामने आया है.
सज्जन कुमार को हाई कोर्ट ने दोषी ठहराए
सज्जन कुमार को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. वही पीड़ितों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एचएस फुल्का ने 1984 के दिल्ली कैंट मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का हवाला दिया था. जिसमें कोर्ट ने दंगों को मानवता के खिलाफ अपराध बताया था. साथ ही कहा था कि नरसंहार का उद्देश्य अल्पसंख्यक को निशाना बनाना होता है.
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और एसआईटी गठित की गई.पिछले साल 4 दिसंबर 2023 को कोर्ट ने सज्जन कुमार के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था. यह घटना 1 नवंबर 1984 की है, जिसमें पश्चिमी दिल्ली के राज नगर में सरदार जसवंत सिंह और सरदार तरुण दीप सिंह की हत्या कर दी गई थी. वही शाम को साढ़े चार बजे दंगाइयों की भीड़ ने पीड़ितों को राज नगर इलाके में स्थित घर पर लोहे के सरियों और लाठियों से हमला कर दिया.
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-भारत एक्सप्रेस
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