प्रतीकात्मक फोटो.
गृह मंत्रालय से दिल्ली पुलिस को ‘सेफ सिटी प्रोजेक्ट’ के लिए मंजूरी मिली. इस प्रोजेक्ट के तहत राजधानी दिल्ली में महिलाओं और आम जनता की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल होगा.
इस योजना के तहत शामिल प्रमुख पहलू सी4आई सिस्टम (इंटीग्रेटेड कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन और कंप्यूटर सेंटर) की स्थापना और पूरे दिल्ली एनसीटी क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों की तैनाती की जाएगी. वहीं फेस रिकग्निशन सिस्टम यानि चेहरा पहचानने की तकनीक वाले खास कैमरे भी लगाए जायेगे. ताकि अपराधियों की पहचान की जा सके. ये कदम दिल्ली की कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए है.
आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख
वही, राज्यसभा में बुधवार को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने वर्ष 2020 से 29 जुलाई 2025 तक कुल 301 मामलों में चार्जशीट दाखिल की है. मंत्री ने इन मामलों में सजा दिलाने की दर 97.08% है, जो बताता है कि एजेंसी के कामकाज में कितनी मजबूती और सटीकता है. यह जानकारी उन्होंने एक सवाल के जवाब में दी, जिससे यह भी साफ होता है कि आतंकवाद और संगठित अपराधों के खिलाफ केंद्र सरकार की जांच एजेंसियां कठोर और प्रभावी कार्रवाई कर रही हैं.
राज्यसभा में नित्यानंद राय बोले CRPF की बटालियन कैंपिंग साइट बिहार के औरंगाबाद में चालू है.
साथ ही सीआरपीएफ के बारे में जानकारी देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में बताया कि सीआरपीएफ की बटालियन कैंपिंग साइट बिहार के औरंगाबाद में अब संचालित हो रही है, और वहां रैपिड एक्शन फोर्स की एक कंपनी तैनात है. उन्होंने कहा कि यह कैंप सरकार द्वारा मंजूर किए गए 25 बटालियन कैंपिंग साइट्स में से एक है, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से स्थापित किया जा रहा है.
अब तक इस कैंप में 120 जवानों के लिए एक बैरक और चारदीवारी का निर्माण पूरा हो चुका है. साथ ही, सड़क, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध करा दी गई हैं. मंत्री ने बताया कि कैंप के लिए बाकी जरूरी बुनियादी ढांचे का निर्माणपूरा किया जाएगा.
31 दिसंबर 2024 तक 6 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए- गृह राज्य मंत्री
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में ये भी बताया कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों ने 31 दिसंबर 2024 तक कुल 6,10,92,555 पौधे लगाए हैं. यह काम देशभर में चलाए गए प्लांटेशन ड्राइव के तहत किया गया. उन्होंने बताया कि यह अभियान देश के सभी 28 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में चलाया गया है. इस अभियान के तहत 2,728 नर्सरियां विकसित की गई हैं और 1,703 वटिकाएं शहीदों के नाम समर्पित की गई हैं. यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ शहीदों को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से चलाई जा रही है.
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