नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने देश में एक सुरक्षित, कुशल और टिकाऊ उड्डयन इकोसिस्टम विकसित करने के उद्देश्य से एक नई पहल के तहत “कॉम्प्रिहेंसिव स्पेशल ऑडिट” की शुरुआत की है.
यह ऑडिट प्रणाली जोखिम आधारित और एकीकृत दृष्टिकोण को अपनाकर न केवल सुरक्षा मानकों की समीक्षा करेगी, बल्कि परिचालन दक्षता और नियामकीय अनुपालन की भी गहराई से जांच करेगी.
DGCA का यह कदम वैश्विक स्तर के उड्डयन सुरक्षा ढांचे की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है.
उड्डयन इकोसिस्टम की व्यापक ऑडिट प्रक्रिया शुरू
इस विशेष ऑडिट का उद्देश्य भारतीय विमानन क्षेत्र की मौजूदा ऑडिट प्रक्रियाओं से आगे जाकर पूरे इकोसिस्टम का समग्र मूल्यांकन करना है.
इसमें सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम (SMS), परिचालन प्रथाएं, जोखिम प्रबंधन और नियामकीय प्रक्रियाओं की समीक्षा की जाएगी, जिससे प्रणालीगत कमजोरियों की पहचान और सुधार किया जा सके.
यह प्रक्रिया ICAO के निर्धारित मानकों, अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं और भारत की राष्ट्रीय उड्डयन सुरक्षा नीति (NASP) के अनुरूप होगी.
DGCA का यह प्रयास भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत करने और बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगा.

विमानन क्षेत्र की सभी इकाइयाँ ऑडिट के दायरे में शामिल
यह विशेष ऑडिट सभी प्रकार की विमानन संस्थाओं जैसे कि अनुसूचित/गैर-अनुसूचित एयरलाइन ऑपरेटर्स, मेंटेनेंस और रिपेयर ऑर्गनाइजेशंस (MROs), उड़ान प्रशिक्षण संस्थान (FTOs), एयर नेविगेशन सेवा प्रदाता (ANSPs), एयरोड्रोम ऑपरेटर्स और ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसियों पर लागू होगा.
इसके साथ ही, टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स, इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम्स और सप्लाई चेन नेटवर्क जैसे सहायक घटकों को भी ऑडिट प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा.
सेफ्टी, ऑपरेशंस और नियमों पर आधारित त्रिस्तरीय मूल्यांकन
इस बहुआयामी ऑडिट फ्रेमवर्क में तीन प्रमुख मूल्यांकन आयाम रखे गए हैं— सेफ्टी आर्किटेक्चर, ऑपरेशनल एक्सीलेंस और रेगुलेटरी कम्प्लायंस. इनमें SMS की प्रभावशीलता, जोखिम प्रबंधन, फ्लाइट और ग्राउंड ऑपरेशंस, क्रू और संसाधन प्रबंधन, और नियमों के अनुपालन की जांच की जाएगी.
इसके लिए एक विशेषज्ञ टीम का गठन किया जाएगा, जिसका नेतृत्व एक वरिष्ठ DGCA अधिकारी करेंगे. टीम में उड़ान सुरक्षा, एयरोस्पेस, एयर नेविगेशन, और एयरोड्रोम मानकों के विशेषज्ञ शामिल होंगे.
आवश्यकता पड़ने पर बाहरी विशेषज्ञों की मदद भी ली जा सकेगी.
आधुनिक तकनीकों से होगा उड्डयन सुरक्षा का समग्र मूल्यांकन
ऑडिट में दस्तावेज़ों की समीक्षा, साइट पर निरीक्षण, संरचित इंटरव्यू, सिमुलेशन टेस्ट और डेटा एनालिसिस जैसे आधुनिक तरीकों का उपयोग किया जाएगा.
इस पहल का उद्देश्य न केवल उड्डयन संस्थानों की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन करना है, बल्कि सुरक्षा संस्कृति और पेशेवर मानकों को और अधिक मजबूत करना भी है.
DGCA की यह पहल भारत में उड्डयन सुरक्षा को वैश्विक स्तर तक ले जाने और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
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-भारत एक्सप्रेस
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