Electoral Reform Discussion: गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में चुनाव सुधार पर चर्चा का जवाब दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि दो दिन संसद की कार्यवाही नहीं चल सकी. लोगों के बीच इस तरह का संदेश देने की कोशिश की गई कि हम चर्चा नहीं चाहते. हम बीजेपी और एनडीए के लोग डिबेट से कभी नहीं भागे.
SIR पर बोले अमित शाह (Amit Shah On SIR)
अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि विपक्ष की डिमांड थी एसआईआर (SIR) पर चर्चा हो. यह चुनाव आयोग का काम है. इस पर चर्चा होगी तो जवाब कौन देगा. जब ये चुनाव सुधार पर चर्चा के लिए तैयार हुए, हमने दो दिन चर्चा की. अमित शाह ने कहा कि चर्चा तय हुई चुनाव सुधार (Electoral Reform) पर, लेकिन विपक्ष के सदस्यों ने एसआईआर पर ही बोला. जवाब तो मुझे देना पड़ेगा. मैंने पहले के भी सभी एसआईआर का गहन अध्ययन किया है और कांग्रेस की ओर से फैलाए गए झूठ का अपने तर्कों के हिसाब से जवाब देना चाहता हूं. चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है.
गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव सुधार पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि चुनाव के लिए चुनाव आयोग जिम्मेदार है. यह व्यवस्था जब बनी, तब हम थे ही नहीं. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था है और अनुच्छेद 324 में चुनाव आयुक्त को विशेष अधिकार दिए गए. अनुच्छेद 326 में मतदाता की पात्रता तय की गई है. मनीष तिवारी कह रहे थे कि एसआईआर का अधिकार चुनाव आयोग को है ही नहीं, तो उनको बताना चाहता हूं कि यह अधिकार चुनाव आयोग को अनुच्छेद 327 में है.
विपक्ष पर साधा निशाना
अमित शाह ने विपक्ष पर एसआईआर (SIR) को लेकर झूठ फैलाने का आरोप लगाया और इसका इतिहास भी गिनाया. अमित शाह ने कहा कि 2000 के बाद तीन बार एसआईआर हुआ और दो बार बीजेपी-एनडीए की सरकार थी, एक बार मनमोहन सिंह की सरकार थी. तब किसी ने विरोध नहीं किया. यह चुनाव को पवित्र रखने की प्रक्रिया है. चुनाव जिस आधार पर होते हैं, वह वोटर लिस्ट ही अशुद्ध है, तो चुनाव कैसे पवित्र हो सकते हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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