भारत-चीन के साथ आने से ट्रंप परेशान.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भारत समेत दुनिया भर के तमाम देशों पर टैरिफ का बोझ डाल दिया है, जिसका असर वैश्विक संबंधों से लेकर व्यापार और बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है. जिन देशों पर ट्रंप ने टैरिफ बम फोड़ा है, वे भी अब अपने-अपने हिसाब से या तो जवाब दे रहे हैं, या फिर देने की तैयारी कर रहे हैं. हाल ही में चीन के तियानजिन में आयोजित हुए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट का आयोजन किया गया. इस समिट पर राष्ट्रपति ट्रंप से लेकर दुनिया के तमाम देशों की नजर थी.
तीनों नेताओं की मुलाकात से Donald Trump बेचैन
एससीओ समिट में शामिल होने के लिए पीएम मोदी ने चीन का दौरा किया था, जहां पर उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के अलावा कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात की, जिसकी तस्वीरें भी सामने आईं, और इन तस्वीरों ने ट्रंप (Donald Trump) को हैरान-परेशान कर दिया. ट्रंप को जो चीज सबसे ज्यादा बैचैन कर रही थी, वो ये कि तीन आर्थिक महाशक्तियों के नेता एक साथ एक मंच पर मिल रहे थे.
Donald Trump के डॉलर को लगेगा झटका
चीन के साथ भारत के रिश्तों पर जमी बर्फ पिछले कुछ दिनों से पिघल रही है, मतलब ये कि अब ये दोनों देश सभी गिले-शिकवे को भुलाकर एक साथ आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं. दूसरी तरफ इन दोनों देशों का साथ रूस भी दे सकता है. एससीओ समिट में इन नेताओं के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें सबसे अहम रहा व्यापार के लिए नया पेमेंट सिस्टम लाने का मुद्दा. चर्चा है कि भारत और चीन डॉलर की जगह व्यापार के लिए एक नया पेमेंट सिस्टम लाने पर विचार कर रहे हैं. अगर ऐसा होता है, तो फिर ट्रंप (Donald Trump) के डॉलर को एक बड़ा झटका लगेगा.
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एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के ग्रैजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस के प्रोफेसर मत्तेओ माज्जियोरी ने भू-अर्थशास्त्र की बदलती भूमिका को लेकर कहा कि “दुनिया भर के ताकतवर देश अब ट्रेड और वित्तीय प्रणाली को राजनीतिक प्रभाव डालने के लिए एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.” उन्होंने इसके लिए चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि “चीन जहां दुर्लभ खनिजों पर नियंत्रण रखता है, तो वहीं अमेरिका वैश्विक वित्तीय प्रणाली का इस्तेमाल करता है.”
नया पेमेंट सिस्टम लाने की तैयारी
माज्जियोरी ने आगे कहा कि भारत और चीन जैसे देश अब व्यापार के लिए एक नया पेमेंट सिस्टम बना रहे हैं, ये दोनों आर्थिक महाशक्तियां अमेरिका के दबाव को करना चाहती हैं, जिससे वे अपना प्रभाव और अधिक बढ़ा सकें.
बता दें कि ये चर्चा ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिका पर भारत ने 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है, और चीन पर भी टैरिफ का बोझ डाला है. ऐसे में अगर भारत और चीन डॉलर के सामने एक नई भुगतान प्रणाली बना लेते हैं, तो इससे अमेरिका को ही नुकसान होगा, क्योंकि अभी दुनिया के तमाम बड़े देश वैश्विक व्यापार के लिए डॉलर का इस्तेमाल करते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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