Dr Dinesh Sharma Rajya Sabha Speech: उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा ने देश के सीमावर्ती क्षेत्रों और कुछ विशिष्ट राज्यों में जनसंख्या के बदलते स्वरूप पर कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की स्थिरता उसकी संतुलित जनसांख्यिकीय संरचना पर टिकी होती है, लेकिन भारत में वर्तमान में आ रहा जनसंख्या असंतुलन दीर्घकालिक राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक ढांचे के लिए एक ‘चिंताजनक संकेत’ है.
आंकड़ों के जरिए जताई चिंता
डॉ. शर्मा ने सदन में पिछले 65 वर्षों के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि देश की सामाजिक संरचना में तेजी से बदलाव आ रहा है. उनके वक्तव्य के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं.
- आबादी में बदलाव: पिछले 65 वर्षों में हिंदू आबादी में 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि मुस्लिम आबादी में 43 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
- अल्पसंख्यक होते हिंदू: देश के 7 राज्यों और सीमावर्ती 100 से अधिक जिलों में हिंदू समाज अब अल्पसंख्यक की स्थिति में पहुँच गया है.
- प्रजनन दर का संकट: हिंदू समाज की प्रजनन दर (Fertility Rate) गिरकर 1.9 प्रतिशत रह गई है, जो जनसंख्या स्थिरीकरण के वैश्विक मानक 2.1 प्रतिशत से भी कम है.
राष्ट्रीय सुरक्षा और घुसपैठ पर प्रहार
सांसद ने विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि अवैध घुसपैठ और प्रलोभन या जबरन कराए जा रहे धर्मांतरण के कारण जनसंख्या का संतुलन बिगड़ रहा है. उन्होंने सरकार से मांग की है कि अवैध घुसपैठ और अवैध धर्मांतरण पर सरकार को सख्त कानूनी लगाम लगानी चाहिए.
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देश में एक ऐसी समान और समावेशी जनसंख्या नीति (Population Policy) की आवश्यकता है, जो बिना किसी भेदभाव के सभी वर्गों पर समान रूप से लागू हो. जिन क्षेत्रों में जनसंख्या का स्वरूप बदला है, वहाँ संसाधनों और सरकारी योजनाओं का वैज्ञानिक तरीके से न्यायसंगत वितरण होना चाहिए ताकि राष्ट्रीय एकता प्रभावित न हो.
बढ़ता वृद्धों का अनुपात चुनौती- दिनेश शर्मा
डॉ. शर्मा ने चेतावनी दी कि प्रजनन दर में लगातार आ रही कमी के कारण भविष्य में कार्यबल (Working Class) कम हो जाएगा और वृद्धजनों का अनुपात बढ़ जाएगा, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक नई चुनौती पेश कर सकता है. उन्होंने समाज में संतुलित परिवार व्यवस्था के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया.
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