Sonipat Earthquake: हरियाणा के सोनीपत जिले में आज सुबह करीब 8:44 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए. स्थानीय लोगों का कहना है कि कंपन इतनी तेज थी कि दीवारें, दरवाजे और बिस्तर तक हिलने लगे. अचानक आए झटकों से लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए.
NCS का क्या कहना है?
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) ने जानकारी दी कि दिल्ली समेत आसपास के इलाकों में भी हल्की कंपन दर्ज की गई. शुरुआती अनुमान के मुताबिक झटकों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.8 से 3.5 के बीच रही. सोनीपत के अलावा रोहतक और झज्जर के कुछ हिस्सों में भी लोग इसे महसूस कर पाए. कई निवासियों ने बताया कि हाल के महीनों में आए झटकों की तुलना में इस बार कंपन ज्यादा तेज थी.
भूंकप का केंद्र
भूकंप का केंद्र उत्तर दिल्ली क्षेत्र बताया गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह झटका स्थानीय फॉल्ट लाइनों से जुड़ा हो सकता है, जैसे दिल्ली-मेरठ फॉल्ट या अरावली रेंज. इससे पहले तिब्बत में भी हल्का भूकंप दर्ज हुआ था, जिसकी तीव्रता 4 मैग्नीट्यूड रही.
दिल्ली-NCR जोन-4 में
दिल्ली-एनसीआर वैसे भी जोन-4 में आता है, जिसे उच्च भूकंप संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है. हाल के महीनों में यहां कई बार हल्के झटके महसूस किए गए हैं, जो ऊर्जा रिलीज़ का संकेत हो सकते हैं. हालांकि इस बार किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन लोगों में डर का माहौल जरूर देखा गया.
क्यों आते हैं भूकंप?
आखिर भूकंप क्यों आते हैं? इसको समझने के लिए सबसे पहले पृथ्वी की संरचना को जानना जरूरी है. हमारी पृथ्वी टैक्टोनिक प्लेट्स पर स्थित है. इन प्लेटों के नीचे तरल पदार्थ लावा है. जिसपर टैक्टोनिक प्लेट्स तैरती रहती हैं. कई बार ऐसा होता है कि ये प्लेटें आपस में टकरा जाती हैं. बार-बार टकराने से इन प्लेट्स के कोने सिकुड़ जाते हैं या फिर टूटने लगते हैं. जिससे नीचे से निकली ऊर्जा बाहर निकलने के लिए रास्ते खोजती है. जिसमें डिस्टर्बेंस होता है और इसी के बाद भूकंप की स्थिति पैदा होती है.
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भूकंप के समय क्या करें?
- खुले मैदान में चले जाएं और इमारतों से दूर रहें.
- टेबल या मजबूत फर्नीचर के नीचे छिपें और सिर को किसी तकिये या हाथ से ढक लें.
- लिफ्ट का इस्तेमाल न करें, सीढ़ियों का सहारा लें.
- बिजली के तारों, पेड़ों और ऊंची इमारतों से दूर रहें.
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