बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमाने लगी है. जैसे-जैसे अक्टूबर-नवंबर में संभावित विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, कांग्रेस ने अपने प्रचार अभियान को तेज़ कर दिया है. राज्य में 35 वर्षों से सत्ता से बाहर रही कांग्रेस अब महागठबंधन के साथ मिलकर सत्ता में वापसी की योजना पर गंभीरता से काम कर रही है.
इस रणनीति के केंद्र में हैं—लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, जो अपनी हालिया “मतदाता अधिकार यात्रा” के ज़रिए राज्य की राजनीतिक ज़मीन को एक बार फिर से तैयार करने में लगे हैं.
राहुल गांधी की अगली नौ यात्राएँ
राहुल गांधी की 16 दिवसीय यात्रा, जिसमें उन्होंने राजद के तेजस्वी यादव, वीआईपी पार्टी के मुकेश साहनी, और वाम दलों के दीपांकर भट्टाचार्य जैसे नेताओं के साथ साझा मंच साझा किया, को कांग्रेस ने सफल माना है. पार्टी इसे अपने अभियान की एक बड़ी ताकत के रूप में देख रही है और अब उसी ऊर्जा को आगे बढ़ाते हुए, नौ और यात्राओं की योजना तैयार कर चुकी है.
पार्टी सूत्रों के अनुसार, इन यात्राओं के ज़रिए राहुल गांधी राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में रोड शो, जनसभाएँ और संवाद कार्यक्रम करेंगे. इसका मक़सद सीधे मतदाताओं तक पहुँच बनाना और बेरोज़गारी, पलायन, शिक्षा और “वोट चोरी” जैसे मुद्दों पर राज्य सरकार को घेरना है.
प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं की भूमिका
कांग्रेस केवल राहुल गांधी पर ही निर्भर नहीं है. पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य वरिष्ठ नेता भी बिहार के चुनावी मैदान में उतरने वाले हैं. प्रियंका गांधी के लिए 20 सितंबर के बाद चंपारण में एक बड़ी जनसभा का कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया है. वहीं, राहुल गांधी की नई यात्राएँ 25 सितंबर से शुरू हो सकती हैं.
इस बार महागठबंधन की रणनीति अधिक संगठित दिख रही है. कांग्रेस, राजद, वीआईपी और वाम दलों के बीच संयुक्त जनसभाओं की योजना बनाई गई है, ताकि समय की बचत के साथ-साथ सभी 243 विधानसभा सीटों तक प्रभावी पहुँच बनाई जा सके. यह मॉडल पश्चिम बंगाल और कर्नाटक जैसे राज्यों से प्रेरित लगता है, जहाँ विपक्षी दलों ने एकजुट होकर चुनाव लड़ा और सफलता पाई.
साथ ही, महागठबंधन जल्द ही एक संयुक्त घोषणापत्र जारी करने की तैयारी में है, जिसमें रोज़गार, सरकारी भर्तियाँ, 200 यूनिट मुफ्त बिजली, ‘माई बहन सम्मान’ योजना जैसे वादे शामिल होंगे. इसे “न्यूनतम साझा कार्यक्रम” के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा—एक ऐसा रोडमैप, जो सत्ता में आने पर गठबंधन के प्राथमिक लक्ष्यों को दर्शाएगा.
लालू और सोनिया की मौजूदगी भी संभावित
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राजद संरक्षक लालू प्रसाद यादव भी चुनाव के अंतिम चरण में प्रचार में भाग ले सकते हैं. हालांकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम सीमित रखा जा सकता है, लेकिन इन दोनों वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी से कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने की उम्मीद है.
महागठबंधन की निगाहें नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को हटाने पर टिकी हैं. एनडीए ने पिछले कुछ वर्षों में सामाजिक योजनाओं और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर काम किया है, लेकिन बेरोजगारी, महँगाई और भ्रष्टाचार जैसे आरोपों से घिरा रहा है. विपक्ष इन्हीं मुद्दों को आधार बनाकर जनता के बीच पहुँचना चाहता है.
अब सबकी नज़र इस बात पर है कि सीट बंटवारे का फार्मूला क्या होगा, और क्या महागठबंधन एकजुट रहकर एनडीए को कड़ी चुनौती दे पाएगा या नहीं.
बिहार चुनाव 2025 की कहानी सिर्फ सत्ता परिवर्तन की नहीं, बल्कि साख और अस्तित्व बचाने की लड़ाई है—खासकर कांग्रेस के लिए. राहुल गांधी की यात्राएँ, प्रियंका गांधी का सक्रिय प्रचार और महागठबंधन की संयुक्त रणनीति मिलकर एक बड़ा राजनीतिक मोर्चा तैयार कर रहे हैं. अब देखना यह है कि जनता इस अभियान को किस तरह से स्वीकार करती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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