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Bihar News: नवादा में गजराज का आतंक – रात को झुंड बनाकर आए 22 हाथी, फसलों को रौंदा, तबाह कर डाले घर

Nawada Elephant Terror : बिहार के नवादा जिले में हाथियों ने फसलों और घरों को नुकसान पहुंचाया. बाद में वनकर्मियों ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर हाथियों को रिहायशी इलाकों से दूर खदेड़ा, लेकिन इलाके के ग्रामीण अब भी दहशत में हैं.

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हरदिया पंचायत के जंगलों में हाथियों के झुंड से मचा कोहराम

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

संवाददाता— अमन कुमार, बिहार


Bihar Elephant Attack: बिहार के नवादा जिले के रजौली प्रखंड में इन दिनों जंगली हाथी ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्‍या बन गए हैं. मंगलवार रात 22 हाथियों के झुंड ने हरदिया पंचायत के कोसदरिया गांव में हंगामा मचा दिया. हाथियों ने तीन घरों को तोड़ डाला, वहीं खेतों में लगी सब्जियों को भी बर्बाद कर दिया.

कोसदरिया गांव के स्थानीय निवासियों के अनुसार, रात के करीब 12 बजे हाथियों ने उनके घरों पर हमला किया. घरों में रखा राशन, कपड़े और अन्य जरूरी सामान नष्ट हो गए. इसके अलावा, किसानों की फसलें भी बर्बाद हो गईं. हाथियों का झुंड कुछ दिन पहले झारखंड के कोडरमा घाटी के मेघातरी क्षेत्र से रजौली में भी गया था, और तब से लगातार फसलों को रौंद रहा था.

ग्रामीणों में भय का माहौल

हाथियों के आने से ग्रामीणों में डर का माहौल है. वे रात में जागकर पहरा दे रहे हैं, क्योंकि किसी भी समय हाथी गांवों में फिर से प्रवेश कर सकते हैं. पिछले कुछ दिनों से इस इलाके में हाथियों का आतंक बढ़ता जा रहा है. इससे पहले, हाथियों ने नवाडीह गांव में नल जल और सोलर लाइट को भी नुकसान पहुंचाया था.

हाथियों को जंगल पहुंचाएंगे

डीएफओ श्रेष्ठ कुमार कृष्णा के अनुसार, हाथियों को वापस झारखंड की ओर भेजने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. वनकर्मियों ने ड्रोन की मदद से निगरानी तेज कर दी है और पटाखे छोड़कर हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ा जा रहा है. इसके साथ ही ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे अपने घरों में सुरक्षित रहें और बाहर न निकलें.

अतिक्रमण भी बड़ी समस्या

स्थानीय रेंजर मनोज कुमार ने बताया कि हाथियों का झुंड मंगलवार रात को देखा गया था और उसे जंगल की ओर भेजने के लिए रेस्क्यू टीम काम कर रही थी. वे मानते हैं कि अब हाथियों का झुंड कहीं और चला गया होगा, हालांकि वनकर्मी लगातार निगरानी बनाए हुए हैं. रेंजर ने यह भी बताया कि जंगल में अतिक्रमण की वजह से कई झोपड़ियों और खेतों को नुकसान हुआ है, लेकिन रैयती भूमि पर बसे लोग अब तक सुरक्षित हैं.

ग्रामीणों का एकजुट प्रयास

ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से एकजुट होकर गांव के आसपास पहरा देने की व्यवस्था की है. उन्होंने पूरी रात निगरानी रखने का निर्णय लिया है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित घटना से बचा जा सके. फिलहाल हाथियों का झुंड कहीं दिखाई नहीं दिया है, लेकिन वनकर्मी और ग्रामीण किसी भी संभावित हमले के लिए तैयार हैं.

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