विधि उत्सव 2025 के उद्घाटन के दौरान, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि साहित्य कानून को मानवीय बनाता है और कानूनी पुस्तकों में संदर्भ और करुणा के बीच के अंतर को पाट सकता है. उन्होंने ओकब्रिज पब्लिशिंग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में अपने विचार रखे. पूर्व सीजेआई ने यह भी कहा कि कानूनी पाठ में जिन चीजों की कमी हो सकती है, जैसे संदर्भ, करुणा और व्यापकता, उन्हें साहित्य से पूरा किया जा सकता है.
कानून और साहित्य का सामाजिक संबंध
डीवाई चंद्रचूड़ ने आगे कहा कि जैसे कानून हमारे समाज से निकलता है, वैसे ही साहित्य भी समाज से जुड़ा हुआ है. हालांकि, कानून को साहित्य और समाज के लिए खोलते वक्त हमें सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से यह चीज़ें रंगीन हो सकती हैं, जो लोकप्रिय तो हो सकती हैं, पर जरूरी नहीं कि वे सबसे श्रेष्ठ हों. उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में, जब जानकारी को अक्सर ज्ञान समझ लिया जाता है, तो तथ्य और कल्पना के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है, ऐसे में हमें सतर्क रहना चाहिए.
सामाजिक वास्तविकताओं को समझने की आवश्यकता
पूर्व सीजेआई ने यह भी कहा कि न्यायालय को अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के उप-वर्गीकरण की वैधता पर निर्णय लेते वक्त समाजशास्त्रीय, ऐतिहासिक और सांख्यिकीय समझ की आवश्यकता है.
-भारत एक्सप्रेस
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