भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बी.आर. गवई इन दिनों श्रीलंका के दौरे पर हैं. अपनी इस यात्रा के दौरान रविवार, 10 मई 2026 को उन्होंने श्रीलंका के कैंडी में स्थित प्रसिद्ध ‘श्री दलादा मालिगावा’ (Temple of the Tooth) मंदिर में दर्शन किए. इस मंदिर का पूरी दुनिया के बौद्ध अनुयायियों के लिए बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है.
बौद्ध मंदिर में लिया आशीर्वाद
पूर्व CJI गवई ने मंदिर के गर्भगृह में जाकर दर्शन किए. इस पावन मंदिर में भगवान बुद्ध के पवित्र ‘दंत अवशेष’ (दांत) रखे हुए हैं. दर्शन के दौरान पूर्व CJI गवई को मंदिर के मुख्य भिक्षु ने विशेष आशीर्वाद दिया. उनके साथ कैंडी में भारत की सहायक उच्चायुक्त सुश्री सरन्या वी.एस. और उच्चायोग के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे.
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
आपको बता दें कि ‘टेम्पल ऑफ द टूथ’ यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल है. मान्यता है कि जो भी इस पवित्र स्थल के दर्शन करता है, उसे शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. पूर्व CJI की इस यात्रा को भारत और श्रीलंका के बीच गहरे सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है.
52वें दीक्षांत समारोह में शिरकत
पूर्व CJI बी.आर. गवई श्रीलंका बार एसोसिएशन के 52वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने श्रीलंका पहुंचे हैं. इससे पहले उन्होंने कोलंबो विश्वविद्यालय में भी अपना संबोधन दिया था, जहाँ उन्होंने संवैधानिक सर्वोच्चता पर विस्तार से चर्चा की थी. बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में उन्होंने वकीलों की स्वतंत्रता को लोकतंत्र के लिए जरूरी बताया था. जस्टिस गवई की यह यात्रा केवल पेशेवर नहीं बल्कि आध्यात्मिक भी रही. कैंडी का यह मंदिर न केवल श्रीलंका की आस्था का केंद्र है, बल्कि भारत के साथ इसके प्राचीन संबंधों को भी दर्शाता है. पूर्व CJI ने मंदिर की वास्तुकला और वहां की शांति की सराहना की.
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