Ganga Saptami 2025: उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित दशाश्वमेध घाट पर शनिवार को गंगा सप्तमी का त्योहार धूमधाम से मनाया गया. इस दिन लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा नदी में डुबकी लगाई. मान्यता है कि गंगा सप्तमी के दिन स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है.
कहीं सूर्य को अर्घ्यदान तो कहीं हुआ दुग्धाभिषेक
गंगा सप्तमी भागीरथ तप के बाद ब्रह्मा के कमंडल से मां गंगा के प्रकट होने की याद में मनाई जाती है. इस दिन श्रद्धालु विशेष पूजा अर्चना करते हैं और गंगा में स्नान करके सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। साथ ही, कई श्रद्धालु घाटों पर दुग्धाभिषेक भी करते हैं. वाराणसी में गंगा घाटों पर इस दिन विशेष तैयारी की जाती है. श्रद्धालु सुबह-सुबह गंगा में स्नान करते हैं और फिर बाबा विश्वनाथ मंदिर में पूजा अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.
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गंगा सप्तमी का धार्मिक महत्व
दशाश्वमेध घाट के पुजारी अजय कुमार पांडेय ने बताया कि मान्यता है कि गंगा सप्तमी के दिन ही देवी गंगा का अवतरण हुआ था. काशी में बहने वाली गंगा को पाप विमोचिनी गंगा कहा जाता है. इसे उत्तरवाहिनी गंगा माना जाता है, जो काशी को मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग बताती है. यहां का जल कभी बाहर नहीं जाता और यही कारण है कि काशी को मोक्ष का द्वार माना जाता है. साथ ही, यहां स्थित विश्व का सबसे बड़ा महाशमशान पितरों के लिए विशेष महत्व रखता है.
गंगा सप्तमी के धार्मिक लाभ
तीर्थ पुरोहित अजय कुमार तिवारी ने बताया कि वैशाख माह में गंगा सप्तमी का पर्व काशीवासियों के लिए खास महत्व रखता है. इस दिन गंगा में स्नान करने से कई पाप समाप्त हो जाते हैं और व्यक्ति को आध्यात्मिक आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसके अलावा, गंगा सप्तमी के दिन स्नान करने से रोगों का निवारण होता है और समृद्धि की प्राप्ति होती है.
-भारत एक्सप्रेस
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