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Global Rankings: इंटरनेशनल रैंकिग एजेंसियों पर भारत ने अपनाया कड़ा रुख, पीएम सलाहकार बोले- फंडिंग एजेंसियां दुनिया में अपना एजेंडा चलाना चाहती हैं

Global Rankings: पीएम के आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने कहा कि भारत ने इन मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाना शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा कि तीन या चार फंडिंग एजेंसियां, जो दुनिया में अपना एजेंडा चलानी चाहती हैं.

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पीएम मोदी

Global Rankings: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक प्रमुख सलाहकार ने शुक्रवार को एक न्यूज एजेंसी को दिए गए इंटरव्यू में कहा कि ‘एजेंडे के तहत भारत के खिलाफ जारी इंटरनेशनल रैंकिंग होती हैं. लेकिन भारत अब इस पर नकेल कसने की तैयारी कर रहा है. पीएम के आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने कहा कि भारत ने इन मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाना शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा कि तीन या चार फंडिंग एजेंसियां, जो दुनिया में अपना एजेंडा चलानी चाहती हैं, वो इन रैंकिंग को नॉर्थ अटलांटिक के छोटे समूहों से तैयार करवाती हैं.

सान्याल ने कहा, “यह केवल गलत तरीके से कथा निर्माण नहीं है. इसका व्यापार, निवेश और अन्य गतिविधियों पर साफ सीधा असर पड़ता है.” रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स द्वारा जारी नए वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत अफगानिस्तान और पाकिस्तान से नीचे है. वी-डेम संस्थान द्वारा अकादमिक स्वतंत्रता इंडेक्स में यह पाकिस्तान और भूटान से नीचे था.

संजीव सान्याल ने आगे कहा कि पिछले एक साल में भारत ने विभिन्न बैठकों में विश्व बैंक, विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) जैसे संस्थानों द्वारा उपयोग किए जाने वाले वैश्विक इंडेक्स को संकलित करने के तरीकों में खामियों की ओर इशारा किया है.

‘केंद्रीय सचिवालय में इस मुद्दे को उठाया गया है’

उन्होंने कहा कि विश्व बैंक भी इस चर्चा में शामिल है, क्योंकि यह इन थिंक-टैंकों से राय लेता है और इसे वर्ल्ड गर्वनेंस इंडेक्स जैसी किसी चीज में शामिल करता है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ल्ड बैंक, डब्ल्यूईएफ, रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स और वी-डेम ने इस टिप्पणी पर जवाब देने पर फिलहाल असमर्थता जताई है. यूएनडीपी ने कहा है कि वो जल्द ही इस पर जवाब देंगे.

संजीव सान्याल ने कहा कि ये ग्लोबल रैंकिंग पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासन से जुड़े फैसले लेते समय अहमियत रखती हैं. कई इंटरनेशनल बैंक पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासन पर आधारित रैंकिंग के हिसाब से लोन सब्सिडी देते हैं. एक सरकारी अधिकारी के अनुार, केंद्रीय सचिवालय में इस मुद्दे को उठाया गया है और इस साल इस मामले को लेकर दर्जनों बैठकें की जा चुकी हैं.

– भारत एक्सप्रेस

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