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सुरक्षा का मजाक या मिलीभगत? 17 फीट की दीवार और 5 लेयर की सुरक्षा… फिर भी सबकी आंखों में धूल झोंककर भाग निकले 3 खूंखार कैदी

झारखंड के हजारीबाग स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा से उम्रकैद की सजा काट रहे तीन कैदी फिल्मी अंदाज में फरार हो गए.

रिपोर्ट-जितेंद्र कुमार


झारखंड के हजारीबाग से एक ऐसी खबर आई है जिसने जेल प्रशासन की नींद उड़ा दी है और राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है. हजारीबाग स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा (जेपी कारा), जिसे झारखंड की सबसे सुरक्षित जेलों में से एक माना जाता है, वहां से उम्रकैद की सजा काट रहे तीन कैदी फिल्मी अंदाज में फरार हो गए हैं. इस घटना के बाद से न सिर्फ हजारीबाग बल्कि पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है.

गिनती के वक्त हुआ खेल

जानकारी के मुताबिक, यह पूरी घटना उस वक्त हुई जब जेल में कैदियों की नियमित गिनती (Roll Call) का समय था. नियमानुसार, सुबह के वक्त सभी कैदियों को उनके बैरकों से बाहर निकाला गया ताकि उनकी हाजिरी ली जा सके. इसी गहमागहमी और भीड़भाड़ का फायदा उठाकर तीनों कैदी सुरक्षा घेरे को चकमा देकर रफूचक्कर हो गए.

शुरुआत में जब गिनती पूरी नहीं हुई, तो जेल कर्मियों को लगा कि शायद कैदी जेल परिसर के ही किसी कोने में होंगे या बाथरूम वगैरह गए होंगे. उन्होंने अपने स्तर पर खोजबीन शुरू की, लेकिन जब घंटों की तलाश के बाद भी तीनों का कहीं पता नहीं चला, तब जेल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए. आनन-फानन में सायरन बजाया गया और जेल के आला अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई.

धनबाद के रहने वाले हैं तीनों भगोड़े

बताया जा रहा है कि फरार होने वाले तीनों कैदी धनबाद जिले के रहने वाले हैं. ये तीनों ही हत्या जैसे संगीन मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे थे. पुलिस को अंदेशा है कि इन्होंने भागने की योजना काफी पहले ही बना ली होगी और किसी बाहरी मदद के जरिए वे जेल की दीवारें लांघने में कामयाब रहे. फिलहाल, धनबाद और हजारीबाग के सभी बॉर्डर इलाकों में नाकेबंदी कर दी गई है और इनके संभावित ठिकानों पर छापेमारी जारी है.

5 लेयर सुरक्षा और हाईटेक सीसीटीवी… फिर भी चूक?

इस घटना ने जेपी कारा की सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है. आपको बता दें कि इस जेल को ‘हाई-सिक्योरिटी जोन’ माना जाता है. यहाँ सुरक्षा की 5 परतें (Layers) हैं, जिनमें चौबीसों घंटे सशस्त्र जवान तैनात रहते हैं. पूरे परिसर में चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और जेल की दीवारें भी काफी ऊंची हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर परिंदा भी जहां पर न मार सके, वहां से तीन-तीन कैदी सबकी आंखों में धूल झोंककर कैसे निकल गए?

क्या यह सुरक्षा में महज एक चूक है या फिर इसके पीछे जेल के अंदरूनी लोगों की मिलीभगत है? पुलिस अब जेल के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों से भी कड़ी पूछताछ की जा रही है.

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-भारत एक्सप्रेस



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