Bharat Express DD Free Dish

PM Modi In China: पीएम मोदी की चीन यात्रा से दोनों देशों के संबंधों में कैसे हो सकता है सुधार?

भारत और चीन के बीच 1 अप्रैल 1950 को कूटनीतिक संबंध स्थापित हुए थे, जिससे भारत पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना को मान्यता देने वाला पहला गैर-साम्यवादी देश बना.

SCO Summit 2025

PM Modi In China: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (30 अगस्त) को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए तियानजिन पहुंचे. यह उनकी 2018 के बाद पहली बार चीन की यात्रा है. 30 अगस्त से 1 सितंबर तक की इस यात्रा को भारत-चीन संबंधों को फिर से स्थापित करने के रूप में देखा जा रहा है, जो अब तक विभिन्न चरणों से गुजर चुके हैं, जिनमें सहयोग, सतर्कता और हाल की स्थिरीकरण की कोशिशें शामिल हैं.

प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत भारतीय समुदाय द्वारा गर्मजोशी से किया गया. वह रविवार को सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक करेंगे.

भारत-चीन के बीच 1 अप्रैल 1950 को संबंध स्थापित हुए

भारत और चीन के बीच 1 अप्रैल 1950 को कूटनीतिक संबंध स्थापित हुए थे, जिससे भारत पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना को मान्यता देने वाला पहला गैर-साम्यवादी देश बना. हालांकि, 1962 के सीमा संघर्ष के बाद रिश्तों पर गहरा असर पड़ा. 1988 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी की यात्रा से इन संबंधों में सुधार की प्रक्रिया शुरू हुई.

इसके बाद के महत्वपूर्ण मील के पत्थर में शामिल हैं: 2003 में पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की यात्रा और सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधि तंत्र की स्थापना; 2005 में चीनी प्रधानमंत्री वेन जीआबाओ की भारत यात्रा, जो सामरिक और सहयोगात्मक साझेदारी की शुरुआत थी; 2014 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा; 2015 में पीएम मोदी की चीन यात्रा; 2018 और 2019 में वुहान और चेन्नई में अनौपचारिक शिखर सम्मेलन.

2020 के बाद से रिश्ते तनावपूर्ण हुए

2020 में पूर्वी लद्दाख सीमा तनाव के बाद रिश्ते तनावपूर्ण हो गए थे. हालांकि, हाल की पहलें, विशेषकर 2024 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच सकारात्मक बैठक, इन रिश्तों में फिर से सुधार की ओर इशारा करती हैं.

कुछ अड़चनों के बावजूद, दोनों देशों ने लगातार कूटनीतिक संवाद बनाए रखा है, जिसमें जी20 हैंगझोउ (2016), ब्रिक्स गोवा (2016), एससीओ अस्ताना (2017) और जी20 बाली (2022) जैसे बहुपक्षीय कार्यक्रमों में बैठकें शामिल हैं.

विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कई बार मुलाकात की है, हाल ही में 2025 में एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक में, जिसके बाद वांग यी ने 24वीं विशेष प्रतिनिधि स्तर की सीमा वार्ता के लिए भारत का दौरा किया था.

ये बैठकें दोनों पक्षों की ओर से स्थिरता लाने के प्रयासों को प्रदर्शित करती हैं, जिसमें संरचित संवाद और व्यावहारिक विश्वास निर्माण उपायों का समावेश है. इन मल्टी-ट्रैक संवादों ने सीमा पर वास्तविक नियंत्रण (एलएसी) के आसपास तनाव बढ़ने से बचने और पारदर्शिता को बढ़ावा देने में मदद की है.


ये भी पढ़ें: पीएम मोदी की यात्रा से चीन में मौजूद भारतीय खुश, कहा- एससीओ से जाएगा संदेश, अमेरिका के हिसाब से नहीं चलेगी दुनिया


-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read