Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

पाकिस्तान जाने वाली हर कॉल पर एजेंसियों की नजर, जानिए कैसे ट्रेस होते हैं देशद्रोही कॉल

पाकिस्तान जाने वाली हर कॉल को भारतीय सुरक्षा एजेंसियां कैसे ट्रैक करती हैं? जानिए कौन-सी तकनीकों और टूल्स की मदद से एजेंसियां देशद्रोहियों तक पहुंच बनाती हैं और कैसे ऑपरेशन सिंदूर जैसे मिशन सफल होते हैं.

Phone Call tracing

देश की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि चाहे दुश्मन सरहद पार हो या देश के भीतर छिपा हो, बचना नामुमकिन है. हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के तहत तीन ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे और पाकिस्तान से संपर्क में थे. अब सवाल यह है कि आखिर कैसे हमारी सुरक्षा एजेंसियां पाकिस्तान जाने वाली हर फोन कॉल पर नजर रखती हैं और इन गद्दारों को पकड़ लेती हैं?

इसका जवाब छिपा है उन हाईटेक तकनीकों और नेटवर्क में, जिनका इस्तेमाल भारत की खुफिया एजेंसियां करती हैं. चलिए सरल भाषा में समझते हैं कि ये कॉल्स कैसे पकड़ी जाती हैं.

कैसे ट्रैक होती हैं पाकिस्तान जाने वाली कॉल्स?

इंटेलिजेंस नेटवर्क: सुरक्षा एजेंसियों का एक मजबूत खुफिया तंत्र होता है, जो देश के भीतर और बाहर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखता है. यही नेटवर्क संदिग्ध कॉल्स की पहचान करने में अहम भूमिका निभाता है.

कानूनी इंटरसेप्शन सिस्टम: सरकार की अनुमति से एजेंसियां खास सॉफ्टवेयर के जरिए फोन कॉल्स इंटरसेप्ट करती हैं. इसका मतलब है कि जब कोई कॉल पाकिस्तान की ओर जाता है, तो सिस्टम अलर्ट हो जाता है और कॉल को रिकॉर्ड या मॉनिटर किया जा सकता है.

टेलीफोन ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी: हर कॉल के पीछे एक लोकेशन और एक सोर्स नंबर होता है. एजेंसियां खास तकनीकों की मदद से कॉल की लोकेशन और उसकी उत्पत्ति (origin) का पता लगा लेती हैं.

आईएमईआई नंबर से निगरानी: हर मोबाइल फोन का एक यूनिक आईएमईआई (IMEI) नंबर होता है. जब कोई फोन कॉल करता है, तो यह नंबर टेलीकॉम टावर से जुड़ जाता है. इसी से पता चलता है कि फोन कहां से इस्तेमाल हो रहा है.

सेल टावर डेटा से लोकेशन ट्रैकिंग: कॉल करते वक्त जो टावर कनेक्ट होता है, उसकी मदद से उस व्यक्ति की सटीक लोकेशन ट्रैक की जाती है. इससे पता चलता है कि संदिग्ध कॉल कहां से की गई.

टेलीकॉम कंपनियों से डेटा: टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स के पास हर कॉल का रिकॉर्ड होता है. सुरक्षा एजेंसियां कानूनी अनुमति के बाद इन कंपनियों से कॉल डिटेल्स और लोकेशन हिस्ट्री हासिल करती हैं.

अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मदद: भारत की एजेंसियां कई अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से भी जुड़ी होती हैं, जो सीमापार होने वाली कॉल्स और संदिग्ध संचार पर नजर रखते हैं. ऐसे में कोई भी संदिग्ध गतिविधि पकड़ में आ जाती है.

सिर्फ सीमापार से ही खतरा नहीं होता, बल्कि कई बार देश के अंदर छिपे लोग भी दुश्मनों के इशारे पर काम करते हैं. ऑपरेशन सिंदूर इसी का एक उदाहरण है, जहां देश के भीतर बैठे लोगों को गिरफ्तार किया गया, जो पाकिस्तान से सीधा संपर्क रख रहे थे.

ये भी पढ़ें- नीरज चोपड़ा ने 90 मीटर का आंकड़ा पार करने पर बधाई संदेश के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद दिया

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital