प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की दो हाथों से दी जाने वाली गर्मजोशी भरी झप्पी अब सिर्फ एक व्यक्तिगत भाव नहीं रही बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की एक नई सांस्कृतिक पहचान बनती जा रही है. व्हाइट हाउस के लॉन से लेकर यूरोप के महलों और एशिया के पवेलियनों तक मोदी की झप्पी अब कैमरों में कैद होती है और अखबारों की सुर्खियों में छाई रहती है.
अलग-अलग देश की अभिवादन शैली
हर देश की अपनी अभिवादन शैली होती है जैसे ब्रिटेन में सादा हैंडशेक, अमेरिका में थोड़ा जोश से हाथ मिलाना, यूरोप में गालों पर किस, जापान में झुककर नमस्कार और अरब देशों में तीन बार गले मिलना. भारत में आमतौर पर ‘नमस्ते’ को सम्मान के साथ जोड़कर देखा जाता है. इसमें सिर झुकाकर, हाथ जोड़कर लोगों से मिला जाता है. कोविड के समय में तो नमस्ते को वैश्विक मान्यता भी मिली थी.
पीएम मोदी की झप्पी की कहानी
पीएम मोदी (PM Modi) की झप्पी एक अलग ही कहानी कहती है. यह औपचारिकता से हटकर अपनापन, आत्मीयता और भावनात्मक जुड़ाव का संकेत देती है. यह पारिवारिक मेल-मिलाप की तरह है ना कि कूटनीतिक प्रोटोकॉल का हिस्सा है. यही वजह है कि कुछ लोग इसे भारत की आत्मविश्वास भरी नई विदेश नीति का प्रतीक मानते हैं. एक ऐसा देश जो अब पश्चिमी औपचारिकताओं की नकल नहीं करता बल्कि अपनी गर्मजोशी को ताकत के रूप में पेश करता है.
आलोचकों का क्या मानना है?
हालांकि, कुछ आलोचक मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हर इशारा नपा-तुला होना चाहिए. झप्पी अगर बिना सोच-समझ के दी जाए तो वह सिर्फ कैमरे के लिए एक शो बन सकती है और अगर सामने वाला उतनी ही गर्मजोशी से जवाब न दे तो यह असहज भी लग सकता है.
झप्पी खुद में कोई समस्या नहीं है. लेकिन इसका इस्तेमाल सोच-समझकर, सामने वाले की संस्कृति और भावनाओं का सम्मान करते हुए होना चाहिए. तभी यह भारत की पहचान और गर्मजोशी के साथ गरिमा भी बनेगी.
लेकिन जब पीएम मोदी (PM Modi) ने राष्ट्रपति ट्रंप, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद या राष्ट्रपति मैक्रों को गले लगाया तो यह सिर्फ दो व्यक्तियों की मुलाकात नहीं थी. यह इतिहास, रणनीतिक हितों और अनकहे एजेंडों का संगम था.
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-भारत एक्सप्रेस
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