Environment Ministry: पिछले दो सालों में भारत सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों में 29 बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पर्यावरणीय मंजूरी दे दी है. संसद में राज्यसभा में लिखित जवाब देते हुए पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि 1 अप्रैल 2023 से 17 अगस्त 2025 के बीच इन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई.
असम में सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट्स
इनमें सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट्स असम में कुल 17 मंजूर हुए हैं. इसके बाद त्रिपुरा में 6, मेघालय में 3, जबकि अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और सिक्किम में एक-एक प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिली है.
पर्यावरण राज्य मंत्री ने क्या बताया?
मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि किसी भी प्रोजेक्ट को मंजूरी देने से पहले कई अहम स्टेप्स पूरे किए जाते हैं, जैसे साइट की जांच, पर्यावरणीय अध्ययन, पब्लिक कंसल्टेशन और एक्सपर्ट कमेटियों द्वारा मूल्यांकन. इसका मकसद है कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण की भी पूरी सुरक्षा हो.
इस जवाब में एक सवाल के तहत यह भी पूछा गया था कि क्या सरकार ने पूर्वोत्तर की संवेदनशील इकोसिस्टम पर इन प्रोजेक्ट्स के असर का मूल्यांकन किया है खासकर जब जामिया मिलिया इस्लामिया की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से खेती पर असर पड़ रहा है और खाद्य सुरक्षा खतरे में है.
हालांकि मंत्री ने रिपोर्ट का नाम नहीं लिया लेकिन उन्होंने बताया कि सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं ताकि जलवायु परिवर्तन, अनियमित बारिश, बाढ़ और सूखे जैसी समस्याओं से निपटा जा सके. इनमें शामिल हैं-
- राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना
- सस्टेनेबल एग्रीकल्चर मिशन
- क्लाइमेट रेज़िलिएंट एग्रीकल्चर इनोवेशन
- पूर्वोत्तर के लिए ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट मिशन
इसके अलावा राज्य सरकारों, ICAR और कृषि विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर खेती को टिकाऊ बनाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम किया जा रहा है.
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सरकार का फोकस साफ है विकास भी हो और पर्यावरण भी बचे.
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