Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

‘दम है तो रोक कर दिखाओ…’, बंगाल में सरकारी नोटिस मिलते ही भड़के हुमायूं कबीर, दी खुली चुनौती

पश्चिम बंगाल में कुर्बानी को लेकर विवाद तेज हो गया है. AJUP प्रमुख हुमायूं कबीर ने बंगाल सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि बकरी और गाय की कुर्बानी कोई नहीं रोक सकता और आगे भी कुर्बानियां जारी रहेंगी.

बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. इस बार विवाद की वजह बने हैं आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर, जिनके एक बयान ने सियासी माहौल को पूरी तरह गर्म कर दिया है. गाय की कुर्बानी को लेकर दिए गए उनके बयान पर अब राज्य में बहस तेज हो गई है और राजनीतिक दल आमने-सामने नजर आ रहे हैं.

हुमायूं कबीर ने कहा कि कुर्बानी इस्लाम की 1400 साल पुरानी परंपरा है और इसे कोई भी सरकार या कानून खत्म नहीं कर सकता है. उन्होंने कहा कि दुनिया रहेगी तो कुर्बानी भी जारी रहेगी. उनके मुताबिक, सरकार चाहे मुसलमानों के बीफ खाने पर रोक लगाने की बात करे, लेकिन धार्मिक परंपराओं में दखल नहीं दिया जा सकता.

उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई कुर्बानी रोकने की कोशिश करेगा, तब भी लोग उसकी बात नहीं मानेंगे. कबीर ने दावा किया कि इस्लाम में जिन जानवरों की कुर्बानी जायज मानी गई है, उनमें गाय, बकरी, ऊंट और दुम्बा शामिल हैं और इनकी कुर्बानी आगे भी होती रहेगी.

सरकार पर भी साधा निशाना

मीडिया से बातचीत के दौरान हुमायूं कबीर ने राज्य सरकार पर भी हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक दिन कुछ कहती है और अगले दिन उसका रुख बदल जाता है. उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोग अपने हिसाब से नियम बना सकते हैं, लेकिन धार्मिक आस्था को दबाया नहीं जा सकता.

दरअसल, पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950 के तहत एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया था. इसी नोटिस को लेकर पूरा विवाद शुरू हुआ है.

पहले भी विवादों में रह चुके हैं कबीर

यह पहली बार नहीं है जब हुमायूं कबीर किसी विवाद को लेकर चर्चा में आए हों. दिसंबर 2025 में उन्होंने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम पर नई मस्जिद बनाने की बात कही थी. उस बयान के बाद उनकी तत्कालीन पार्टी TMC ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें निलंबित कर दिया था.

इसके बाद उन्होंने अपनी अलग पार्टी ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ बनाई. नई पार्टी के साथ उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा और रेजीनगर व नवदा सीट से जीत दर्ज की. अब बकरीद से पहले दिया गया उनका यह बयान एक नए राजनीतिक तूफान की वजह बनता दिखाई दे रहा है.

जहां हुमायूं कबीर खुलकर कुर्बानी के समर्थन में बोल रहे हैं, वहीं फुरफुरा शरीफ के वरिष्ठ पीरजादा तोहा सिद्दीकी का रुख अलग है. उन्होंने कहा कि गोहत्या को लेकर जो कानून बने हैं, उनका पालन हर किसी को करना चाहिए. उनके मुताबिक, कुर्बानी के दौरान गायों की हत्या नहीं होनी चाहिए.

हालांकि उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर देश में कानून एक है, तो उसका पालन हर राज्य में बराबर तरीके से होना चाहिए. उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर गोमांस का कारोबार और निर्यात होता है, ऐसे में केवल बंगाल को निशाना बनाना सही नहीं है.

तोहा सिद्दीकी ने यह भी कहा कि उन्होंने खुद बीफ खाना छोड़ दिया है और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. उनका कहना था कि अगर कोई बीफ नहीं खाएगा तो उससे जिंदगी रुक नहीं जाएगी.

मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने क्या कहा?

हुमायूं कबीर के बयान पर पश्चिम बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सिर्फ 1950 से लागू कानून को सख्ती से लागू कर रही है. उनके मुताबिक, कानून में साफ लिखा है कि 14 साल से कम उम्र के मवेशियों को नहीं काटा जा सकता.

उन्होंने बताया कि अगर कोई जानवर बूढ़ा, बीमार या अपाहिज है, तभी संबंधित अधिकारी के प्रमाणपत्र के बाद उसे काटने की अनुमति दी जा सकती है. अग्निमित्रा पॉल ने पिछली सरकारों पर वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले कानून को गंभीरता से लागू नहीं किया गया, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार गाय को माता मानती है और कानून के मुताबिक ही कार्रवाई करेगी.

ये भी पढ़ें: सौरव गांगुली ने मंत्री दिलीप घोष से की मुलाकात, तस्वीर वायरल होते ही राजनीति गलियारे में मची हलचल

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital