नई दिल्ली में शनिवार को भारत और एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) के बीच सहयोग बढ़ाने को लेकर अहम बातचीत हुई. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एआईआईबी की अध्यक्ष जू जियायी के साथ बैठक में भारत की बढ़ती इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों और आने वाले वर्षों की विकास प्राथमिकताओं पर चर्चा की.
बैठक में सड़क, रेल और परिवहन कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने पर बात हुई. इसके अलावा स्थानीय मुद्रा में वित्तपोषण बढ़ाने और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के विकल्पों पर भी विचार किया गया. एआईआईबी की वैश्विक भूमिका और पहुंच को और मजबूत करने का मुद्दा भी बातचीत का हिस्सा रहा.
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था के तेजी से विस्तार के साथ देश में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे की जरूरत बढ़ रही है. ऐसे में एआईआईबी आने वाले समय में भारत की विकास यात्रा में और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. खासकर टिकाऊ विकास, बेहतर परिवहन व्यवस्था और मजबूत लॉजिस्टिक्स से जुड़ी परियोजनाओं में दोनों पक्षों के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं देखी जा रही हैं.
जू जियायी 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंची हैं. विदेश मंत्रालय ने उनकी यात्रा को सतत विकास और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच नए अवसर पैदा करने वाली साझेदारियों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया है.
रूस के साथ आर्थिक रिश्तों पर भी चर्चा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इससे पहले रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव से भी मुलाकात की. इस बैठक में भारत और रूस के बीच आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा हुई.
दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय निवेश संधि यानी बीआईटी पर चल रही बातचीत को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई. इसका मकसद दोनों देशों के बीच निवेश को बढ़ावा देने के लिए ऐसा ढांचा तैयार करना है, जिससे दोनों पक्षों को फायदा हो और कारोबारी संबंध और मजबूत हों.
बैठक में वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी बात हुई. भारत और रूस के बीच व्यापारिक गतिविधियां लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई हैं, ऐसे में वित्तीय क्षेत्र में बेहतर सहयोग को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों के लिए अहम माना जा रहा है.
ब्रिक्स में ‘नई दिल्ली घोषणा पत्र 2026’ पर सहमति
नई दिल्ली में चल रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी कई महत्वपूर्ण फैसले सामने आए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को बताया कि सदस्य देशों ने ‘नई दिल्ली घोषणा पत्र 2026’ को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया है.
सम्मेलन में ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत बनाने’ के मुद्दे पर चर्चा हुई. सत्र के समापन पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि घोषणा पत्र ब्रिक्स देशों के साझा संकल्पों को एक स्पष्ट दिशा देता है. अब असली चुनौती इन संकल्पों को जमीन पर ठोस नतीजों में बदलने की है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि सम्मेलन के दौरान नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक परिस्थितियों के साथ-साथ ब्रिक्स के भीतर सहयोग को और मजबूत करने के मुद्दों पर विस्तार से विचार किया. उन्होंने बातचीत को सार्थक और रचनात्मक बताया.
मोदी के मुताबिक, बदलती वैश्विक परिस्थितियों ने यह संकेत दिया है कि दुनिया की नई जरूरतों और चुनौतियों से निपटने के लिए केवल पुरानी संस्थाओं और पुराने तौर-तरीकों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है. ऐसे में बहुपक्षीय सहयोग को ज्यादा प्रभावी और समावेशी बनाने की जरूरत है.
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-भारत एक्सप्रेस
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