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भारत की रक्षा क्षेत्र में नई क्रांति: निर्यात, उत्पादन और आत्मनिर्भरता के साथ वैश्विक शक्ति बनने की ओर तेजी से बढ़ता देश

भारत का रक्षा क्षेत्र तेज़ी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है. निर्यात में ज़बरदस्त बढ़ोतरी, घरेलू उत्पादन में रिकॉर्ड और आत्मनिर्भर भारत की नीति ने देश को रक्षा तकनीक के वैश्विक केंद्र के रूप में उभारा है.

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Prashant Rai Edited by Prashant Rai

पिछले एक साल में भारत के रक्षा क्षेत्र में जबरदस्त बदलाव देखने को मिला है. ऑर्डर में भारी बढ़ोतरी, निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि और उत्पादन के ऐतिहासिक आंकड़े—इन सभी ने इस सेक्टर को शेयर बाजार के सबसे आकर्षक क्षेत्रों में ला खड़ा किया है. कोविड-19 के बाद जब रक्षा शेयरों ने तेजी दिखाई थी, उसके बाद थोड़ी सुस्ती जरूर आई, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच यह सेक्टर एक बार फिर निवेशकों के लिए चर्चा का केंद्र बन गया है.

पिछले कुछ हफ्तों में रक्षा शेयरों में आई मजबूती कोई संयोग नहीं है. वैश्विक स्तर पर लगातार अस्थिरता और सुरक्षा खतरों के चलते सैन्य तैयारियों की मांग फिर से जोर पकड़ रही है. भले ही कुछ क्षेत्रों में युद्धविराम लागू हुआ हो, लेकिन असली चिंता अब भी बनी हुई है. ऐसे में दुनियाभर में देश अपने रक्षा बजट को फिर से प्राथमिकता दे रहे हैं. भारत भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में बताया कि भारत के रक्षा निर्यात में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है—वित्त वर्ष 2013-14 में ₹686 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में ₹23,622 करोड़ तक पहुंच गया है. रक्षा उत्पादन भी ₹1.60 लाख करोड़ के पार जाने की उम्मीद है, जबकि सरकार का लक्ष्य 2029 तक इसे ₹3 लाख करोड़ तक ले जाने का है. ये केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह भारत के आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते मजबूत कदम हैं. हाल ही में भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान भारत की रक्षा क्षमताओं ने वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी दक्षता और विश्वसनीयता को साबित कर दिया है.

वैश्विक स्तर पर भी रक्षा खर्च एक नया मुकाम छू चुका है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के अनुसार, 2024 में दुनिया भर का रक्षा खर्च $2,718 अरब तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.4% अधिक है—यह शीत युद्ध के बाद की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है.

वर्तमान में विश्व की GDP लगभग $110 ट्रिलियन है, जिसका करीब 2.5% रक्षा खर्च पर किया जा रहा है. भारत के रक्षा निर्यात अभी $2.7 बिलियन हैं, जो वैश्विक रक्षा बाजार का केवल 0.1% है. अगर 2030 तक यह बाजार $3 ट्रिलियन तक पहुंचता है और भारत इसमें 1% की हिस्सेदारी हासिल करता है, तो हमारा रक्षा निर्यात $30 बिलियन तक पहुंच सकता है. यह दर्शाता है कि इस क्षेत्र में कितना बड़ा विकास अवसर मौजूद है.

भारत अभी दुनिया के टॉप 5 रक्षा खर्च करने वाले देशों में शामिल है. वर्ष 2024 में भारत का रक्षा बजट $86.1 बिलियन रहा, जिसमें साल-दर-साल 1.6% की वृद्धि हुई. लेकिन आंकड़ों से परे, जो सबसे अहम है, वह है भारत के रक्षा क्षेत्र में हो रहे संरचनात्मक सुधार. ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत देश में घरेलू निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है. SIPRI के मुताबिक, भारत के रक्षा आयात में 2015-19 और 2020-24 की तुलना में 9.3% की गिरावट आई है—जो इस बात का संकेत है कि भारत अब अपनी जरूरतों को खुद पूरा करने की क्षमता हासिल कर रहा है.

आगे की दिशा की बात करें तो भारत सरकार का लक्ष्य FY29 तक रक्षा निर्यात को ₹50,000 करोड़ तक पहुंचाना है. निर्यात के साथ-साथ घरेलू मांग में भी तेजी से बढ़ोतरी की उम्मीद है. नीति समर्थन, दीर्घकालिक पूंजी निवेश और आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए कदमों से यह सेक्टर दीर्घकालिक विकास के लिए पूरी तरह तैयार दिखता है.

निवेशकों के लिए यह एक निर्णायक मोड़ हो सकता है. शुरुआती तेजी के बाद जो ठहराव आया था, वह अब फिर से तेजी में बदलता दिख रहा है. मजबूत बुनियादी स्थिति, अनुकूल नीतियां और वैश्विक मांग को देखते हुए यह भारतीय रक्षा शेयरों में दीर्घकालिक तेजी की शुरुआत हो सकती है.

-भारत एक्सप्रेस



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