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India US Trade Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी के बीच 2 फरवरी (रविवार) को हुई एक फोन कॉल ने वैश्विक व्यापार के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है. ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामानों पर लगने वाले टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया है. यह फैसला भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक जीत है, जिसने उसे अपने पड़ोसी प्रतिद्वंद्वियों पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया है.
पड़ोसियों पर भारी पड़ा भारत
इस समझौते से पहले भारत दुनिया की उन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल था, जिन पर अमेरिका ने 50% तक का भारी-भरकम टैरिफ लगा रखा था. लेकिन अब नई दरों के लागू होने के बाद भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में मुकाबला आसान हो गया है.
- भारत: अब भारतीय सामान पर सिर्फ 18% टैरिफ लगेगा.
- पाकिस्तान: पाकिस्तान को अब भी 19% शुल्क देना होगा.
- बांग्लादेश और श्रीलंका: टेक्सटाइल हब होने के बावजूद इन देशों को 20% टैरिफ देना होगा.
- वियतनाम: मैन्युफैक्चरिंग का गढ़ माने जाने वाले वियतनाम पर भी 20% टैरिफ है.
- चीन: भारत का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी चीन अभी भी 34% टैरिफ का सामना कर रहा है, जो भारत से लगभग दोगुना है.
इसका सीधा फायदा भारत के कपड़ा, जेम्स एंड ज्वैलरी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मिलेगा, क्योंकि अब उनके उत्पाद अमेरिकी बाजार में चीन और वियतनाम से सस्ते होंगे.
‘दोस्ती’ और ‘तेल’ की शर्त
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस डील की पुष्टि करते हुए लिखा कि पीएम मोदी के प्रति सम्मान और दोस्ती के चलते, हम टैरिफ घटाने पर सहमत हुए हैं. हालांकि, इस राहत के बदले अमेरिका ने कुछ शर्तें भी रखी हैं. ट्रंप का दावा है कि भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ और बाधाओं को “शून्य” करने पर सहमति जताई है. रूस से तेल खरीदना कम करने और इसके बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से ऊर्जा खरीदने का वादा किया है.
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दुनिया में कहां खड़ा है भारत?
यह बदलाव कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ब्राजील पर अभी भी 50% और कनाडा पर 35% टैरिफ है. वैश्विक स्तर पर अब भारत केवल ब्रिटेन (10%), जापान और यूरोपीय संघ (15%) के विशिष्ट क्लब से थोड़ा ही पीछे है, जबकि मेक्सिको (25%) और दक्षिण अफ्रीका (30%) जैसे देश भारत से कहीं ज्यादा टैक्स चुका रहे हैं.
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