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भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा: आत्मनिर्भरता और मेक इन इंडिया के तहत रक्षा उपकरणों के निर्माण में तेजी

हाल ही में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में आयोजित एक महत्वपूर्ण सेमिनार में देश के राष्ट्रीय सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा की गई.

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नई दिल्ली: हाल ही में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में आयोजित एक महत्वपूर्ण सेमिनार में देश के राष्ट्रीय सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा की गई.

इस सेमिनार में प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की, चाहे वह जल, थल, या वायु सुरक्षा हो. विशेषज्ञों ने यह बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भारत के आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए कदमों ने उसे और भी मजबूत किया है.

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत

सेमिनार में उपस्थित विशेषज्ञों ने मेक इन इंडिया कार्यक्रम की तारीफ करते हुए कहा कि इसके तहत भारत में ऐसे रक्षा उपकरणों का निर्माण किया जा रहा है जो उसे दुनिया के अग्रणी देशों की श्रेणी में खड़ा करते हैं. 1960 में भारत ने विभिन्न प्रकार के टैंक का निर्माण शुरू किया था, और अब उसमें भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है.

अब भारत न केवल अपने उपकरणों का निर्माण करता है, बल्कि दूसरे देशों के साथ रक्षा संबंधों को भी मजबूत करता है, विशेष रूप से मेरीटाइम डिप्लोमेसी के तहत. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की समुद्री स्थिति को और मजबूत किया जा सकता है, जिससे उसकी सुरक्षा में और वृद्धि होगी.

चीन से मुकाबला: रक्षा उपकरणों की मजबूती

चीन, जो हमेशा भारत का प्रतिद्वंदी रहा है, उसके रक्षा उपकरणों में निरंतर वृद्धि हो रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, चीन ने स्पेस सिक्योरिटी, नेवी और अंडरवाटर सिस्टम में अपनी क्षमता को काफी बढ़ाया है. चीन ने अपने सबमरीन्स की संख्या में भी वृद्धि की है. लेकिन भारत भी इन क्षेत्रों में पीछे नहीं है और लगातार अपनी रक्षा क्षमता को बढ़ा रहा है.

भारत में रक्षा उपकरणों का निर्माण जारी है और इसकी आवश्यकता है कि रक्षा बजट में भी बढ़ोत्तरी की जाए ताकि भारत अपनी सुरक्षा को और मजबूत बना सके.

रक्षा क्षेत्र में शोध का महत्व

यह सेमिनार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सिक्योरिटी और स्ट्रेटेजिक स्टडीज द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें विश्वविद्यालय के शोध छात्र भी शामिल हुए. विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि रक्षा क्षेत्र में शोध और विकास के कार्यों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, ताकि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को हर पहलू से मजबूत किया जा सके.


संवाददाता- राकेश सिंह, भारत एक्सप्रेस


 



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