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नक्सलवाद मुक्त भारत की ओर, 2026 का ऐतिहासिक लक्ष्य

Naxalism Free India: भारत नक्सलवाद से आजादी की कगार पर है. 2014 के बाद से हिंसक घटनाएं आधी रह गईं, बड़े कमांडरों ने आत्मसमर्पण किया और विकास योजनाओं ने दूरदराज इलाकों को जोड़ा. 2026 तक नक्सलवाद मुक्त भारत का लक्ष्य अब करीब है.

Naxalism Free India: नक्सल आंदोलन 1970 के दशक में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ. चारु मजूमदार और कानू सान्याल जैसे नेताओं ने इसे स्थानीय शोषण के खिलाफ विद्रोह के रूप में शुरू किया लेकिन धीरे-धीरे यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चुनौती बन गया. दशकों तक कमजोर राजनीतिक इच्छाशक्ति और असंगत कार्रवाई ने इसे बढ़ावा दिया.

भारी मानवीय कीमत

2010 में दंतेवाड़ा में 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए और एक महीने बाद 31 नागरिकों की जान गई. उस समय सरकार की प्रतिक्रिया सीमित बातचीत तक ही रही. सबक साफ था- सतत और दृढ़ संकल्प के बिना नक्सलवाद खत्म नहीं हो सकता.

पैसा तो आया, असर नहीं

2000 के दशक में नक्सल प्रभावित इलाकों के लिए बड़े फंड दिए गए लेकिन नतीजे कमजोर रहे. 2009 तक नक्सलवाद 20 राज्यों और 223 जिलों में फैल चुका था. ‘ऑपरेशन ग्रीन हंट’ भी राजनीतिक दबाव में असफल रहा. यह दौर दिखाता है कि सिर्फ पैसा बिना राजनीतिक इच्छाशक्ति बेकार है.

2014 के बाद का बदलाव

पिछले दशक में सुरक्षा और विकास दोनों पर जोर दिया गया. 2004–2014 के मुकाबले 2014–2024 में हिंसक घटनाएं आधी रह गईं. 2025 में ही 270 नक्सली मारे गए, 680 गिरफ्तार हुए और 1,225 ने आत्मसमर्पण किया. बड़े कमांडरों के सरेंडर ने पुनर्वास योजनाओं की विश्वसनीयता साबित की.

आधुनिक सुरक्षा और टेक्नोलॉजी

576 पुलिस स्टेशन, 336 नए कैंप, 68 हेलिपैड, ड्रोन और एआई निगरानी से सुरक्षा मजबूत हुई. एनआईए और ईडी ने 403 संपत्तियां जब्त कर वित्तीय नेटवर्क तोड़ा.

विकास से जड़ों पर वार

12,000 किलोमीटर सड़कें, हजारों मोबाइल टावर, बैंक शाखाएं और पोस्ट ऑफिस अब दूरदराज़ इलाकों तक पहुंच चुके हैं. युवाओं के लिए 48 आईटीआई और 61 स्किल सेंटर खोले गए. आत्मसमर्पण करने वालों को आर्थिक मदद और ट्रेनिंग दी जा रही है.

अंतिम चरण

आज सिर्फ छह जिले गंभीर रूप से प्रभावित हैं. बड़े कमांडरों की मौत और सरेंडर से ताकत टूटी है लेकिन विचारधारा अभी भी जिंदा है. सरकार की रणनीति ने नक्सलवाद को किनारे कर दिया है पर सतर्कता जरूरी है.

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भारत अब नक्सलवाद मुक्त होने की कगार पर है. अगर यही दृढ़ संकल्प जारी रहा, तो 2026 तक देश इस छाया से पूरी तरह आज़ाद हो सकता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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