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Indo-PAK Border पर सैन्य कार्रवाई: BSF ने दुश्मन को दिया करारा जवाब, जानिए जम्मू में किस स्तर पर लड़ी गई लड़ाई

भारत के ऑपरेशन सिंदूर से बौखलाए पाकिस्तान ने सीमावर्ती इलाकों में सिविलियंस को निशाना बनाया. हालांकि, वहां सिर्फ गोलियां नहीं बरसीं, बल्कि दुश्मन को बीएसएफ के एक्शन से भारतीय जज्बे और अपराजेय आत्मबल की गूंज सुनाई दी.

  • जहाँ मिट्टी से उठता है शौर्य, वहीं खड़ी होती है बीएसएफ की दीवार

नई दिल्ली/जम्मू: भारत-पाकिस्तान सीमा पर जंग जैसे हालात बन गए हैं. सीमा सुरक्षा बल (BSF) के वीर जवानों ने पाकिस्तान की ओर से हुई भारी गोलीबारी का ऐसा करारा जवाब दिया कि दुश्मन ​पीछे खदेड़ने पर मजबूर हो गया. संघर्ष इतना भीषण था कि सिर्फ बीएसएफ की एक यूनिट ने हजारों राउंड गोलियां चलाईं और भारी गोला-बारूद खर्च किया.

सबसे बड़ी बात:

यह आंकड़ा सिर्फ एक यूनिट का है.
जम्मू सेक्टर में बीएसएफ की 20 से अधिक यूनिट्स तैनात हैं.
आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि मौजूदा हालात कितने भयावह और युद्ध जैसे हैं.

बीएसएफ के आंकड़े खुद गवाही दे रहे हैं कि युद्ध किस स्तर पर लड़ा गया:
• 5.56 MM राइफल से 2970 राउंड फायरिंग
• 7.62 MM LMG से 3546 राउंड फायरिंग
• AGS (ऑटोमैटिक ग्रेनेड सिस्टम) से 59 राउंड दागे गए
• TAR (Tavor असॉल्ट राइफल) से 119 राउंड फायर
• 51 MM मोर्टार से 39 HE (हाई एक्सप्लोसिव) गोले छोड़े गए
• 81 MM मोर्टार से 167 HE गोले दागे गए
• CGRL से भी ग्रेनेड और गोले छोड़े गए

यह सिर्फ एक यूनिट का आँकड़ा है. बाकियों का हिसाब लगाइए — असली युद्ध जैसी स्थिति

बहादुरी की कीमत: हमारे जांबाज़ घायल जवान

इस संघर्ष में कई जवान घायल हुए, लेकिन उनका हौसला न डगमगाया और न ही उन्होंने मोर्चा छोड़ा. घायल जवानों की सूची में शामिल हैं:
• SI/GD व्यास देव — ब्लास्ट में बायां पैर गंवाया, ICU में भर्ती.
• CT सुधि राभा — कई जगह गहरी छर्रे की चोटें, वार्ड में इलाज.
• SI/GD मोहम्मद इम्तियाज — गर्दन और बाजू में गंभीर चोटें, दाहिने हाथ का कटाव.
• HC बृज मोहन सिंह — चेहरे पर गंभीर चोटें, दोनों जबड़ों की हड्डियों में फ्रैक्चर.
• CT दीपक चंद्र — पैर और जांघ में छर्रे और फ्रैक्चर.
• अन्य जवान जैसे भूपेंद्र बाजपेई, राजन कुमार, दीपेश्वर बर्मन और बसवराज भी घायल हुए, लेकिन डटे रहे.

भारत माता के वीर सपूत, बीएसएफ के जांबाज़ सिपाही, कॉन्स्टेबल (जीडी) दीपक चिमनगाखम और सब इंस्पेक्टर मोहम्मद इम्तियाज़ ने अपनी अंतिम सांस तक देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया. इनकी शहादत को हम कोटि-कोटि नमन करते हैं.

जब तक सूरज और चाँद रहेगा, इनकी वीरता की गाथाएँ हमारी पीढ़ियाँ सुनाती रहेंगी. ये सिर्फ जवान नहीं थे, बल्कि भारत माता की अमर संतान थे, जिनकी कुर्बानी ने हमें एक सुरक्षित भविष्य दिया.

आज हर भारतीय का सिर गर्व से ऊँचा है और दिल इन अमर शहीदों के प्रति कृतज्ञता से भरा है. आपका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा, देश हमेशा ऋणी रहेगा.

बीएसएफ का संदेश: “हिम्मत हमारी ढाल है, सीमा हमारी शान

बीएसएफ ने अपने बयान में साफ कहा:


“हम अपने हर घायल वीर के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करते हैं. हर जवान का शौर्य हमारे संकल्प को और मजबूत करता है. जो देश की ओर बुरी नजर उठाएगा, उसे ऐसा जवाब मिलेगा कि आने वाली पीढ़ियाँ याद रखेंगी.”

आज सीमा पर सिर्फ गोलियां नहीं बरसीं, बल्कि दुश्मन को भारतीय जज्बे और अपराजेय आत्मबल की गूंज सुनाई दी है.

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