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भारत के रिकॉर्ड 863.1 अरब डॉलर के निर्यात में एफटीए की बड़ी भूमिका, नए बाजारों तक बढ़ी पहुंच- मोदी सरकार

मोदी सरकार द्वारा आज संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 863.1 अरब डॉलर का अब तक का सबसे अधिक निर्यात (एक्सपोर्ट) दर्ज किया.

भारत ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मोर्चे पर एक नया मुकाम हासिल किया है. मोदी सरकार ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल निर्यात 863.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. यह अब तक का सबसे बड़ा निर्यात आंकड़ा है. सरकार का कहना है कि इसमें मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की अहम भूमिका रही है, जिनकी वजह से भारतीय कंपनियों को दुनिया के कई बड़े बाजारों तक पहुंच आसान हुई है.

लोकसभा में एक लिखित जवाब में वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि भारत के निर्यात में वस्तुओं और सेवाओं, दोनों का योगदान रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में जहां सामानों का निर्यात (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट) 441.8 अरब डॉलर रहा, वहीं सेवा क्षेत्र का निर्यात बढ़कर 421.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया. दोनों क्षेत्रों के मजबूत प्रदर्शन ने भारत के कुल निर्यात को नई ऊंचाई दी है.

सरकार यह देख रही है कि अलग-अलग देशों के साथ हुए व्यापार समझौतों का भारतीय निर्यातकों को कितना फायदा मिल रहा है. इसके लिए सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन और साझेदार देशों के व्यापार आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है. इससे पता चलता है कि भारतीय कंपनियां शुल्क में मिलने वाली छूट का किस तरह इस्तेमाल कर रही हैं.

भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) का असर साफ दिखाई दे रहा है. यह समझौता 1 मई 2022 से लागू हुआ था और अब तक इसके तहत 4.45 लाख से ज्यादा सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए जा चुके हैं. इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में भारतीय निर्यातकों ने यूएई बाजार में मिलने वाली शुल्क रियायतों का फायदा उठाया है.

यूएई को भारत से भेजे जाने वाले उत्पादों की विविधता भी बढ़ी है. वित्त वर्ष 2021-22 में जहां 7,546 टैरिफ लाइनों के तहत निर्यात हो रहा था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 8,053 हो गई. इन उत्पाद श्रेणियों के जरिए करीब 37.3 अरब डॉलर का निर्यात हुआ.

ऑस्ट्रेलिया और मॉरीशस के साथ भी बढ़ा व्यापार

भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ईसीटीए) ने भी निर्यातकों को फायदा पहुंचाया है. इस समझौते के तहत अब तक 2.73 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए गए हैं. समझौता लागू होने से पहले वित्त वर्ष 2020-21 में यह संख्या केवल 1,482 थी. बाद के वर्षों में हर साल औसतन 45,527 सर्टिफिकेट जारी किए गए.

ऑस्ट्रेलिया के बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच भी बढ़ी है. वित्त वर्ष 2021-22 में 5,396 टैरिफ लाइनों के जरिए निर्यात होता था, जो 2025-26 में बढ़कर 5,668 तक पहुंच गया. इन उत्पाद श्रेणियों के तहत करीब 7.2 अरब डॉलर का निर्यात किया गया.

मॉरीशस के साथ हुए समझौते का भी सकारात्मक असर देखने को मिला है. भारत-मॉरीशस सीईसीपीए के तहत 1,956 सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन का इस्तेमाल किया गया. मॉरीशस को निर्यात की जाने वाली टैरिफ लाइनों की संख्या 3,593 से बढ़कर 4,345 हो गई है. इन श्रेणियों में करीब 473 मिलियन डॉलर का निर्यात दर्ज किया गया.

खाड़ी और यूरोपीय बाजारों में भी बढ़ी पहुंच

भारत-ओमान सीईपीए के तहत भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा मिला है. इस समझौते के जरिए भारत के करीब 99.38 प्रतिशत निर्यात को मूल्य के आधार पर शुल्क मुक्त पहुंच मिली है. यह ओमान की 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को कवर करता है.

सरकार के अनुसार, समझौते के बाद अब तक 783 सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए जा चुके हैं. ओमान को निर्यात होने वाली टैरिफ लाइनों की संख्या मई 2026 के 2,879 से बढ़कर जून 2026 में 3,371 हो गई. जून 2026 में इन उत्पादों का निर्यात 622.8 मिलियन डॉलर रहा, जो मई 2026 के 402.7 मिलियन डॉलर से 54.7 प्रतिशत अधिक था.

इसके अलावा, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए)-टीईपीए समझौते से भी भारतीय निर्यातकों को लाभ मिला है. इस समझौते के तहत भारत को 92.2 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर रियायत मिली है, जो देश के 99.6 प्रतिशत निर्यात को कवर करती है. अक्टूबर 2025 से लागू इस समझौते के बाद अब तक 7,885 सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए जा चुके हैं.

श्रम आधारित उद्योगों को मिल रहा बढ़ावा

जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में जिन व्यापार समझौतों पर काम किया है, उनमें टेक्सटाइल, चमड़ा और दूसरे श्रम-प्रधान उद्योगों को खास महत्व दिया गया है. यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड और ईएफटीए देशों के साथ हुए समझौतों ने भारतीय उत्पादों के लिए नए अवसर खोले हैं.

सरकार का कहना है कि इन समझौतों में जहां भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ाने का मौका मिला है, वहीं घरेलू उद्योगों और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है. आने वाले समय में इन समझौतों के जरिए भारत अपने निर्यात को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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